Sinchai Pranali Aur Bharat Mein Sinchai Ke Sadhan

Rajkumar Yadav
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 सिंचाई प्रणाली व भारत में सिंचाई के साधन और कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

Sinchai Pranali Aur Bharat Mein Sinchai Ke Sadhan
सिंचाई प्रणाली व भारत में सिंचाई के साधन

भारत में सर्वाधिक सिंचाई कुओं एवं नलकूपों से की जाती है। (55 . 9 %) वही द्वितीय नंबर पर नहर है। जिससे भारत में  (31 . 4 %) सिंचाई की जाती है। और तृतीय नंबर पर तालाब है। जिससे भारत में (6 . 1 %) सिंचाई की जाती है। तथा तालाब के द्वारा सर्वाधिक सिंचाई दक्षिण भारत में की जाती है। वही भारत में अन्य स्त्रोतों (6 . 6 %) सिंचाई की जाती है। 

कुओं एवं नलकूपों - के द्वारा सिंचाई में अग्रणीय राज्य गुजरात है। अर्थात गुजरात में कुओं एवं नलकूपों से सर्वाधिक सिंचाई की जाती है। तो वही नलकूपों की सर्वाधिक संख्या उत्तरप्रदेश में है। 

नहर - के द्वारा सिंचाई में अग्रणीय राज्य पंजाब है जहाँ नहरों से सर्वाधिक सिंचाई की जाती है। 

तालाब - के द्वारा सिंचाई में अग्रणीय राज्य तमिलनाडु (दक्षिण भारत) है। जहाँ तालाब द्वारा सर्वाधिक सिंचाई की जाती है। 

इंदिरा गाँधी नहर - ये भारत की सबसे लम्बी सिंचाई नहर है। तथा नहर की लम्बाई 650 किलोमीटर है। व इसे पहले राजस्थान नहर के नाम से जाना जाता था। और यह नहर हरी के बांध से निकलती है। तथा इंदिरा गाँधी नहर को सतलज नदी से पानी मिलता है।

जल की अशुद्धता के कारक 

जल प्रदुषण का अर्थ

जल प्रदुषण निवारण एवं नियंत्रक अधिनियम 1944 की धारा 2 (ड) के अनुसार जल प्रदुषण का अर्थ जल का इस प्रकार का संक्रमण या जल के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में इस प्रकार का परिवर्तन या किसी (व्यापारिक) औद्योगिक बहि :स्त्राव का या किसी तरल वायु (गैसीय) या ठोस वस्तु का जल में विजर्सन जिससे उपताप हो रहा हो या होने की संभावना हो जल प्रदुषण कहलाता है। 

केंद्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड (CENTRAL POLLUTION CONTROL BOARD) का गठन एक सांविधिक संगठन के रूप में जल (प्रदुषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 के अंतर्गत सितंबर 1974 में किया गया था। 

शुद्ध पानी का मानक - 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सन 1971 में जो मानक पेयजल के लिए निर्धारित किए है। वे है - 
  • भौतिक मानक
  • रासायनिक मानक
(1) भौतिक मानक - विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पेयजल ऐसा होना चाहिए। जो स्वच्छ शीतल, स्वादयुक्त तथा गंधरहित हो।
(2) रासायनिक मानक - विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पेयजल का PH मान 7 से 8 . 5 के मध्य हो। 

जल प्रदुषण के स्त्रोतों अथवा कारणों को दो वर्गों में बांटा जा सकता है -
  • प्राकृतिक स्त्रोत 
  • मानवीय स्त्रोत 
(1) प्राकृतिक स्त्रोत - भूस्खलन के दौरान खनिज पदार्थ, पेड़ - पौधों की पत्तियां जल में मिलती है। जिससे जल प्रदुषण होता है। तथा जल में जिन धातुओं का मिश्रण होता है। उन्हें विषैले पदार्थ कहते है। जैसे - सीसा, पारा, आर्सेनिक तथा कैडमियम। इसके अतिरिक्त जल में बेरियम, कोबाल्ट, निकिल एवं वैनेडियम जैसे विषैली धातुएं भी अल्पमात्रा में पाई जाती है। 
(2) मानवीय स्त्रोत - घरेलु बहि :स्त्राव, वहित मल, कृषि बहि :स्त्राव, औद्योगिक बहि :स्त्राव, तेल प्रदुषण, रेडियोधर्मी अपशिष्ट आदि। 

जल में विद्ध्यमान रोग कारक तथा उनसे होने वाले रोग

रोग

रोगकारक

पोलियों, पीलिया, गैस्ट्रोइंटराइटिस विषाणु
डायरिया जीवाणु
हैजा व्रिवियोकॉलेरी
मियादी बुखार (टायफाइड) सालमोनेरा टायफी

महत्वपूर्ण

बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमाण्ड परिक्षण जल प्रदुषण को मापने के लिए की जाती है। पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को मनाया जाता है। जिन क्षेत्रों में भूमिगत जल खतरनाक सीमा तक नीचे चला जाता है। डार्क जोन कहलाता है। विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है। या विश्व जल संरक्षण दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है। 

प्रदूषक (POLLUTION)

उत्त्पत्ति - खनिज तेल, कोयला जलाने से, NITROGEN वायुमंडल की नमी को ग्रहण करके HNO3 यानी, NITRIC ACID बना लेते है। जो वर्षा के जल के साथ पृथ्वी पर पहुंचने लगता है। तब हम उसे ACID RAIN अम्लीय वर्षा कहते है। 

सरल शब्दों में - NITROGEN के OXIDES (NoX) वायुमंडल की नमी H2O (पानी) को ग्रहण कर लेते है। और HNO3 यानि NITRIC ACID बनाते है। जो वर्षा के जल के साथ पृथ्वी पर पहुंचता है। तब हम उसे अम्लीय वर्षा (ACID RAIN) कहते है। 

नुकसान - यदि मनुष्य के शरीर में NoX की अधिक सान्द्रता बड़ जाने से मनुष्य में निमोनियों, रक्त - स्राव, आँखों में जलन, फेफड़े का कैंसर आदि रोग हो जाते है। 

सल्फर के ऑक्साइड (SOX)

SOX से शरीर की कोशिकाओं का लेवल (PH - POTENTIAL OF HYDROGEN) गिर जाता है। अर्थात एंजाइम की क्रिया गिर जाती है। जिससे मनुष्य में, आँखों में जलन, चक्कर आना, तथा साँस लेने में तकलीफ होना जैसी बीमारियां हो जाती है। जिसकी उत्त्पति अर्थात सल्फर के ऑक्साइड कारखानों से सर्वाधिक उत्सर्जित होते है। जो मनुष्य के लिए हानिकारक सिद्ध होते है। उदा0 मथुरा में तलशोधक कारखाने होने से वहां से सर्वाधिक SO2 निकलती है। परिणामस्वरूप ताजमहल के मार्वल का क्षरण हो रहा है। अर्थात अम्ल वर्षा या कारखानों के प्रदुषण के कारण प्राचीन भवन या मूर्तियां गलने लगती है।

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