राज्य की कार्यपालिका, एवं राज्यसभा व लोकसभा में अंतर
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| राज्य की कार्यपालिका |
भारत अर्थात इंडिया, कुल 29 राज्यों तथा 7 केंद्र शासित प्रदेशों का संघ है। संघ की शासन की व्यवस्था - संविधान के भाग - 5 में A - 52 से 151 के अंतर्गत दिया गया है। व राज्य की शासन की व्यवस्था - संविधान के भाग -6 में A - 151 से 237 में दिया गया है। इसलिए संविधान के भाग - 6 को राज्यों का संविधान " Constitution of State " कहा जाता है। तथा भाग - 6 में जो भी शासन से संबंधी व्यवस्थाएँ निर्धारित की गई है। वह जम्मू - कश्मीर को छोड़कर प्रत्येक राज्यों पर लांगू होती है। तथा भाग - 6 के प्रयोजनों के लिए A - 152 राज्य शब्द को परिभाषित करता है। जिसके अनुसार इस भाग के राज्य शब्द के अंतर्गत जम्मू - कश्मीर राज्य नहीं आता है। क्योकि A - 370 के तहत जम्मू - कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है।
संविधान में कुछ अन्य राज्य भी है। जिनके संबंध में A - 371 से 371 (झ) के तहत कुछ विशेष प्रावधान किए गए है। तथा जम्मू - कश्मीर के अलावा संविधान में कुछ राज्यों के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए गए है। जो सिर्फ इन्ही राज्यों पर लागू होते है। ये राज्य निम्न है -
- महाराष्ट्र तथा गुजरात - 371
- नागालैंड - 371 (क)
- असम - 371 (ख)
- मणिपुर - 371 (ग)
- आँध्रप्रदेश - 371 (घ, ड)
- सिक्किम - 371 (च)
- मिजोरम - 371 (छ)
- गोवा - 371 (झ)
राजयपाल
संघ के समान राज्यों में संसदीय शासन प्रणाली है। अत: राज्य के कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता है। तथा राज्यपाल की सहायता तथा सलाह के लिए एक मंत्रिपरिषद होती है। जो सामूहिक रूप से विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होती है। तथा संवैधानिक रूप से राज्य के कार्यपालिका की शक्ति राज्यपाल में निहित होती है। किन्तु वास्तविक रूप से इन शक्तियों का प्रयोग मंत्रीपरिषद् द्वारा किया जाता है। व राज्यपाल के बारे में, प्रावधान संविधान भाग - 6 में A - 153 - 162 में दिया गया है। एवं A - 153 के तहत प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा (किन्तु एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। ) - 7 वॉ संविधान संशोधन अधिनियम 1956 के द्वारा यह प्रावधान किया गया।
राज्यपाल की नियुक्ति
A - 155 के तहत राष्ट्रपति के द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति की जाती है। वस्तुत: राष्ट्रपति उस व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त करता है। जिसे केंद्र सरकार द्वारा नामांकित किया जाता है। अत: राज्यपाल केंद्र का नाम निर्देशित होता है। तथा राज्यपाल एक स्वतंत्र संवैधानिक पद है। जो न तो केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। और न ही उसके अधीनस्थ्य। (हरगोविन्द पंत बनाम रघुकुल तिलक SC)
राज्यपाल की अहर्ताएं (QUALIFICATIONS)
A - 157 के अनुसार राज्यपाल में दो योग्यताएँ होनी चाहिए -
- भारत का नागरिक हो (जन्म से अनिवार्य नहीं)
- उसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो।
तथा A - 158 के तहत वह किसी सदन का सदस्य न हो। तथा किसी लाभ के पद पर न हो।
कार्यकाल
A - 156 राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त तथा अधिकतम 5 वर्ष, तथा कार्यकाल समाप्ति पर तब तक, जब तक की किसी दूसरे के नियुक्ति उस स्थान पर न हो जाए।
राज्यपाल के वेतन एवं भत्ते
सितम्बर 2005 में संसद द्वारा पारित ' राज्यपालों की परिलब्धियां ' भत्ते एवं विशेषाधिकार (संशोधन) अधिनियम - 2008 के अनुसार राज्यपाल का वेतन 36,000 से बढ़ाकर 1,10,000 रु कर दिया गया है। जो राज्य की संचित निधि से दिया जाता है। तथा राज्यपाल निःशुल्क आवास का अधिकारी होता है।
राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिमान
A - 159 राज्यपाल अपना पद ग्रहण करने से पूर्व, राज्यपाल उस राज्य के उच्च न्यायालय को मुख्य न्यायाधीश या उसकी अनुपस्तिथि में सबसे वरिष्ठ न्यायधीश के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा।
राज्यपाल की शक्तियां तथा कार्य
- राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी। तथा वह इसका प्रयोग संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधिकारीयों द्वारा करेगा। A - 154 (1)
- राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है। तथा मुख्यमंत्री की सलाह से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। और उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाता है। तथा राज्य का प्रत्येक मंत्री राज्यपाल के प्रसाद पर्यन्त अपना पद धारण करते है। A - 164 (1)
- A - 167 राज्यपाल के प्रशासन संबंधी और विधान विषयक कोई भी जानकारी मुख्यमंत्री से मांग सकता है।
- राज्यपाल राज्य के उच्च अधिकारीयों यथा - राज्य के महाधिवक्ता की राज्य के लोक सेवा आयोग, तथा अन्य आयोगों के सदस्य व विश्व विद्यालय के उप कुलपतियों आदि की नियुक्ति करता है। तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के बारे में राष्ट्रपति को परामर्श देता है।
- राज्य - सूची के विषयों पर राज्यपाल का सम्पूर्ण अधिकार है। व समवर्ती सूची में भी उसका तब तक अधिकार है। जब तक संसद द्वारा बनाए गए कानून से, राज्य द्वारा बनाए गए कानून का विरोध नहीं होता है।
महत्वपूर्ण
लोकसभा अध्यक्ष अपने कास्टिंग वोट का प्रयोग केवल तब करते है। जब वोट बराबर - बराबर होने के नाते टाई हो। A - 110 के अंतर्गत धन विधेयक को परिभाषित किया गया है। जी0वी0 मावलंकर प्रथम स्पीकर जिनके विरुद्ध लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। भारत की संचित निधि से निधि निकालने के लिए भारत की संसद का अनुमोदन अनिवार्य है। तथा संघीय बजट की तैयारी और उसे संसद में पेश करने के लिए उत्तरदायी आर्थिक कार्य विभाग होता है।
राज्यसभा व लोकसभा में अंतर
राज्यसभा |
लोकसभा |
| राज्यसभा को उच्च सदन कहा जाता है। | जबकि लोकसभा निम्न सदन होता है। |
| राज्यसभा स्थाई होता है। | जबकि लोकसभा अस्थाई होता है। |
| राज्यसभा को भंग नहीं किया जा सकता | जबकि लोकसभा को भंग किया जा सकता है। |
| राज्यसभा में सदस्य संख्या 250 (अधिकतम), 245 (वर्तमान) | जबकि लोकसभा में सदस्य संख्या 550 + 2 (अधिकतम), 545 (वर्तमान) है। |
| राज्यसभा में उम्र सीमा 30 वर्ष है। | जबकि लोकसभा में उम्र सीमा 25 वर्ष है। |
| राज्यसभा में सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। | जबकि लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। |
| राज्यसभा के अध्यक्ष को सभापति कहा जाता है। | जबकि लोकसभा के अध्यक्ष को स्पीकर कहा जाता है। |
| राज्यसभा को द्वितीय सदन कहा जाता है। | जबकि लोकसभा को प्रथम सदन कहा जाता है। |
| राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्यों के MLA द्वारा किया जाता है। | जबकि लोकसभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान द्वारा होता है। |
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