प्रमुख धार्मिक स्थल एवं पर्यटन स्थलों का विवरण
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| प्रमुख धार्मिक स्थल एवं पर्यटन स्थल |
आज के इस लेख में हमने पूरी सटीकता के साथ प्रमुख धार्मिक स्थल एवं पर्यटन स्थलों के बारे में चर्चा की है। ताकि आपको एक ही जगह पर इसकी पूरी जानकारी प्राप्त हो सके। हमने इस लेख में प्रमुख धार्मिक स्थल एवं पर्यटन स्थल के नाम के साथ उनके प्रसिद्धि के कारण से भी अवगत कराया है।
यह लेख सभी प्रतियोगिता परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्योकि प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के बारे में अक्सर पूछा जाता है। ऐसे उम्मीदवार जो धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर घूमने की चाहा रखते है। या जो परीक्षा की तैयारियों में जूठे है। वह नीचे दिया गया लेख अवश्य पढ़े।
(1) साँची - रायसेन
- संक्षिप्त विवरण - विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल है। जो UNESCO की विश्व पुरातात्विक सूची में 1989 में शामिल हुआ।
- प्रसिद्धि का कारण - स्तूप निर्माता - अशोक (मौर्य वंश)
- स्तूपों की संख्या - 03 यहाँ देश का सबसे बड़ा स्तूप है।
(2) विदिशा - पुराना नाम - भेलसा, बेसनगर
- प्रसिद्धि का कारण - " उदयगिरि की गुफाएँ " साँची से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर, विदिशा मार्ग पर है। उदयगिरि छोटा सा गाँव है। उदयगिरि की गुफाएँ गुप्तकाल से सम्बंधित है।
- गुफाओं की संख्या 20 है। स्थानीय लोग इसे सूरज गुफा कहते है। गुफा न पाँच में भगवन विष्णु के वराह अवतार का चित्रण है। गुफा न उन्नीस को अमृत गुफा भी कहा जाता है।
- ग्यारसपुर - साँची से लगभग 56 किलोमीटर की दूरी पर ग्यारसपुर है। ग्यारसपुर " पुरातात्विक स्थल " है। यहाँ पर अठरवंभा, ब्रजमठ, मालोवी मंदिर, बौद्ध स्तूप, हिण्डोला तोरण प्रमुख स्मारक है।
(3) उज्जैन - पुराना नाम - अवंति, अवंतिका, उज्जयनी
- यह शिप्रा नदी के तट पर स्तिथ है। यहाँ प्रत्येक वर्ष बारह वर्ष में कुंभ का आयोजन होता है। बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश के कारण इसे सिंहस्थ कहा जाता है।
- प्रसिद्ध स्थल - महाकालेश्वर मंदिर, कालभैरव मंदिर, गोपाल जी मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर, मंगलनाथ मंदिर (यहाँ सर्वप्रथम हिन्दुओं ने भूगोल को समझा था) ऋषि संदीपनी का आश्रम, कालिया देह महल, भृर्तहरि की गुफाएँ, जंतर - मंतर।
- प्राचीन ज्योतिष गणनाओं के आधार पर उज्जैन को विश्व का केंद्र बिन्दु माना जाता है। इसलिए सभी ज्योतिष गणनाएँ उज्जैन को आधार मानकर की जाती है।
(4) खजुराहों - छतरपुर
- प्रसिद्धि का कारण - मंदिर
- निर्माता - चंदेल शासक
- खजुराहों नगर चंदेल शासकों का धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र था जिसकी आधारशिला विख्यात राजा चंदवर्मा ने रखी। तथा छतरपुर जिले में स्तिथ यह प्रदेश का मुख्य पर्यटन स्थल है। व मंदिरों का निर्माण काल 950 ईस्वी से लेकर 1050 के बीच माना जाता है। यहाँ शैव, जैन, वैष्णव धर्म से संबंधित मंदिर है। यहाँ लगभग 85 मंदिर बनाए गए लेकिन अब इनकी संख्या कम होती जा रही है। वर्तमान में मंदिरों की संख्या 22 है।
- खजुराहों के मंदिरों को भौगोलिक दृष्टि से तीन भागों में बांटा गया है। पश्चिम समूह, पूर्वी समूह और दक्षिण समूह।
- पश्चिमी समूह में - " लक्ष्मण मंदिर, कंदरिया महादेव, चौसठ योगिनी, चित्रगुप्त मंदिर, विश्वनाथ और मातगेश्वर मंदिर है।
- पूर्वी समूह - " पाशर्वनाथ मंदिर, घेटाई मंदिर और आदिनाथ मंदिर का अपना अलग ही महत्त्व है।
- दक्षिण समूह - " दूल्हादेव मंदिर और चतुर्भुज मंदिर स्तिथ है।
- अर्थात 1986 में खजुराहों को UNESCO की विश्व पुरातात्विक धरोहर सूची में शामिल होने वाला राज्य का प्रथम स्थल बना।
(5) मंदसौर - पुराना नाम - दसपुर
- प्रमुख स्थल -
- (A) सूर्य मंदिर (गुप्तकालीन),
- (B) पशुपतिनाथ मंदिर।
(6) ओमकारेश्वर - खण्डवा - पुराना नाम - मानधाता
- प्रमुख स्थल - महादेव का मंदिर, आदिशंकराचार्य की गुफाएं, सिद्धनाथ का मंदिर, ओंकारेश्वर का मंदिर, ममलेश्वर मंदिर आदि। दर्शनीय स्थल है।
- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले में स्तिथ है। इस ज्योतिर्लिंग को ममलेश्वर व अमलेश्वर भी कहते है। जो नर्मदा नदी के तट पर स्तिथ है। जिस तट पर यह ज्योतिर्लिंग स्थापित है। वहाँ " ॐ " की आकृति दिखाई देती है। इसलिए इस ज्योतिर्लिंग का नाम ओंकारेश्वर हैं।
- धर्म ग्रंथों के अनुसार यहाँ 68 तीर्थ स्तिथ है। यहाँ 33 करोड़ देवता परिवार सहित निवास करते है। यह खण्डवा में नर्मदा तट पर स्तिथ है। यह बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है। " ओंकारेश्वर " का प्राचीन नाम मान्धाता है। व देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में इसकी गणना की जाती है।
- ओंकारेश्वर में नर्मदा घाट, चौबीस अवतार, सिद्धनाथ मंदिर, मार्कण्डेय आश्रम, ममलेश्वर महादेव सहित अन्य स्थल दर्शनीय है।
(7) महेश्वर - खरगोन (महिष्मति)
- प्रमुख स्थल - होल्कर छतरी, राजेश्वर मंदिर, सहस्त्र धारा जलप्रताप महेश्वर में निमांड उत्सव का आयोजन होता है।
- रामायण और महाभारत में महेश्वर महिष्मति के नाम से संबोधित किया गया है। तथा महेश्वर, खरगोन जिले में स्तिथ है। इसका प्राचीन नाम महिष्मति था। जो अहिल्याबाई और हेर्ह वंश की राजधानी रही। (कीर्ति वीर अर्जुन) तथा सहस्त्रधारा जलप्रताप के साथ ही राजेश्वर मंदिर, और अहिल्या संग्रहालय भी यहाँ पर स्तिथ है। यहाँ साड़ियों के लिए भी प्रसिद्ध है। तथा महेश्वर नर्मदा के किनारे स्तिथ है।
(8) पंचमढ़ी - होशंगाबाद
- जो सतपुड़ा की रानी के नाम से प्रसिद्ध है। प्रदेश का एक मात्र - हिल स्टेशन, प्रदेश का प्रथम जैव आरक्षित क्षेत्र पंचमढ़ी है तथा पंचमढ़ी के खोजकर्ता कैप्टन फ़ारसोथ (1859) है। व सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी - धूपगढ़ (1350 मीटर) है।
- अत: सौन्दर्य के कारण ही पंचमढ़ी को " सतपुड़ा की रानी " एवं मध्यप्रदेश का " कश्मीर " कहा जाता है।
- पंचमढ़ी के प्रमुख दर्शनीय स्थल - " जटाशंकर गुफा में शंकर जी के शिवलिंग " के दर्शन होते है।
- पांडव गुफाएँ - कहा जाता है। की पांडवों ने अपना अज्ञातवास यही किया था।
- हांड़ी खो - यह घाटी ( V ) शेप में हरे - भरे वृक्षों से आच्छादित है। जो 300 फुट गहरी है।
- तथा सन 1964 में श्रीमती इंदिरा गाँधी यहाँ पर आयी तो इस दर्शनीय स्थल का नाम उनके बचपन के नाम पर प्रियदर्शनी पॉइंट रखा गया।
- यहाँ गुफा के प्रवेश द्वार पर हनुमानजी की भव्य प्रतिमा है।
(9) अमरकंटक - पुष्पराजगढ़, अनूपपुर
- यहाँ से 3 नदियों का उदगम होता है। (1) नर्मदा (2) सोन (3) जोहिला।
- दर्शनीय स्थल - नवग्रह मंदिर, कपिलधारा और दुग्धधारा, नर्मदा कुण्ड।
- नर्मदा नदी का उदगम स्थल " अमरकंटक " है। जो एक मनोहारी पर्यटन धार्मिक स्थल है। पुराण में इसे " सर्वतीर्थ नायक्रम " बताया गया है। जिसका अर्थ है की अमरकंटक सभी तीर्थों में श्रेष्ठ है।
- यहाँ स्तिथ कुल मंदिरों की संख्या 24 बतायी जाती है। तथा नर्मदा माई के मंदिर में " नर्मदा देवी और पार्वती देवी की प्रतिमा है। समीप ही नर्मदा कुण्ड है।
- तथा अमरकंटक अनूपपुर जिले की " पुष्पराजगढ़ तहसील " में स्तिथ है। यहाँ से नर्मदा, सोन जोहिला नदी निकलती है।
- तथा माई की बगिया, माई का मंदिर, कपिल धारा, दुग्धधारा, नर्मदा कुण्ड आदि यहाँ के दर्शनीय स्थल है। और यह प्राचीन मंदिर है। जिसे कलचुरी राजाओं ने बनवाया था।
(10) चित्रकूट सतना जिला
- इसे संगीत नगरी भी कहा जाता है। देवी शारदा का मंदिर सतना जिले में स्तिथ है।
- चित्रकूट उत्तरप्रदेश एवं मध्यप्रदेश की सीमा पर प्रदेश के सतना जिले में स्तिथ है। तथा चित्रकूट मंदाकनी नदी के किनारे स्तिथ है। यहाँ पर ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने बाल अवतार लिया था। व महर्षि अत्रि और सती अनुसुइया का आश्रम सतना जिले के चित्रकूट में स्तिथ है। जहाँ इन्होने तप किया था। तथा भगवान राम और सीता ने वनवास के चौदह वर्ष में से ग्यारह वर्ष चित्रकूट में व्यतीत किए।
(11) दतिया
- यहाँ पीताम्बरा पीठ नामक शक्ति पीठ है जो सोनगिरि (दतिया) में स्तिथ है। अर्थात यह मंदिर जैन धर्म से संबंधित है।
- प्रसिद्धि का कारण - महाराजा परीक्षित की छत्री, महाराजा इंद्रजीत की छत्री, भवानी सिंह की छत्री, सतखंडा महल।
(12) आदमगढ़ की गुफाएँ
- आदमगढ़ एक अति प्राचीन स्थान है। यहाँ स्तिथ प्राचीन पत्थरों पर की गई चित्रकारी के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है।
- आदमगढ़ मध्यप्रदेश के होशंगाबाद नगर में 2 किलोमीटर दूर नर्मदा नदी के पास स्तिथ है। आदमगढ़ की विश्व विख्यात चित्रित शैलाकृत गुफाएँ है।
(13) उदयगिरि की गुफाएँ
- मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में उदयगिरि की गुफाएँ स्तिथ है।
- इन गुफाओं को पहले नीचेगिरि के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर " बीस " गुफाएँ है। जो " हिन्दू और जैन " मूर्तिकारी के लिए प्रसिद्ध है।
(14) भर्तृहरि की गुफाएँ (उज्जैन)
- शिप्रा नदी के तट पर उज्जैन में भर्तृहरि की गुफा स्तिथ है। राजा भर्तृहरि ने तपस्या की थी। अर्थात यह गुफा शहर से बाहर एक सुनसान इलाके में है।
- और यहाँ पर एक गुफा और है। जो की पहली गुफा से छोटी है। यह गोपीचंद की गुफा है। जो की भर्तृहरि का भतीजा था।
- तथा गुफा में भर्तृहरि की प्रतिमा के सामने एक धूनी भी है। जिसकी राख हमेशा गर्म ही रहती है। इसी गुफा में भर्तृहरि ने 12 वर्षों तक तपस्या की थी।
(15) बाघ की गुफाएँ
- बाघ की गुफाएँ मध्यप्रदेश में इंदौर के पास धार में स्तिथ है।
- जो 90 मील की दूरी पर दक्षिण ढलान पर स्तिथ है। व इस गुफा की खोज 1818 में हुई थी। जो अपने भित्ति चित्रों के लिए बहुत प्रसिद्ध है।
- जो भगवान बुद्ध से सम्बंधित है।
- गुफाओं की संख्या 09 है।
- अर्थात यह कोई प्राकृतिक गुफाएँ नहीं है। वरन स्थापत्यकारों द्वारा पहाड़ी को काटकर बनाई गई है। इसलिए इन्हे गुफा कहने के बजाय " रॉक कट आर्किटेक्चर " कहना ज्यादा सही होगा।
(16) पाण्डव गुफाएँ
- पंचमढ़ी में स्तिथ पांडव गुफाएँ पांच छोटी पहाड़ियों का समूह है। ऐसा विश्वास है की अपने वनवासकाल के दौरान पांडवों ने यहाँ शरण ली थी।
(17) माडा की गुफाएँ
- सिंगरौली में सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में से एक माडा गुफाएँ है।
- तथा माडा, बैढ़न तहसील से 32 किलोमीटर की दूरी पर है। व इन गुफाओं में 7 वी, 8 वी सदी की तारीख मिलती है।
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