Mughal Aur Unka Prashasan मुगल कालीन कला, वास्तुकला, संस्कृति और साहित्य

Rajkumar Yadav
0

मुगल और उनका प्रशासन एवं मुगल कालीन कला, वास्तुकला, संस्कृति और साहित्य

Mughal Aur Unka Prashasan मुगल कालीन कला, वास्तुकला, संस्कृति और साहित्य
मुगल कालीन कला, वास्तुकला, संस्कृति और साहित्य

सम्राट नागरिक, सैनिक, प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी होता था। तथा मुगल सम्राटों ने खलीफा की शक्ति को स्वीकार नहीं किया और स्वयं को बादशाह घोषित कर दिया। 

प्रमुख विभाग तथा मंत्री

वकील सर्वाधिकार महत्वपूर्ण अधिकारी
दीवान यह वित्त मंत्री होता था
मीरबख्शी सैन्य विभाग का प्रमुख
मुहतसिब जन - आचरण का निरीक्षक
सूद्र - उस - सुदूर धर्म विभाग का प्रमुख

प्रांतीय प्रशासन

अकबर का साम्राज्य 15 प्रांतों या सूबों में विभाजित था। तथा प्रत्येक प्रान्त सूबेदार या नाजिम या सिपहसालार के अधीन होता था। और निजाम की सहायता के लिए राज्यों में भी दीवान, बख्सी, कोतवाल आदि होते थे। 

न्यायिक प्रशासन

सम्राट न्याय का सबसे बड़ा स्त्रोत था। तथा सम्राट के पश्चात् काजी - उल - कुजात होता था। साथ ही दंड की व्यवस्था भी कठोर होती थी। 

अकबर की भू - राजस्व निति

अकबर ने एक करोड़ दाम का राजस्व वसूलने वाले अधिकारीयों की नियुक्ति की बाद में अकबर के समय टोडरमल ने भू - राजस्व के लिए दहसाला पद्धति लागूं की। तथा इस पद्धति में 10 वर्षों की औसत उपज के आधार पर, उस औसत का 1 / 3 भाग राजस्व के रूप में वसूल किया जाता था। तथा यह दहसाला व्यवस्था कहलायी। और अकबर व जहांगीर के काल में भू राजस्व कुल उपज का 33 प्रतिशत था। लेकिन शाहजहाँ ने इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तथा ओरंगजेब ने 66 प्रतिशत कर दिया था।

मनसबदारी व्यवस्था

मुगलों की सैन्य एवं नागरिक सेवाएं मनसबदारी में सगठित थी। तथा अकबर ने सर्वप्रथम 1574 ईस्वी में मनसबदारी का आरंभ किया मनसबदार अरबी भाषा का शब्द है। तथा इसके आधार पर राज्य में व्यक्ति की पद स्तिथि का निर्धारण होता था। तथा मनसबदारी में दो पद थे - 
  • जात व्यक्तिगत हैसियत एवं 
  • सवार 
सवार शब्द सैन्य दायित्व का बोधक था। तथा अकबर के मनसबदारी प्रथा का उद्देश्य साम्राज्य के स्थायित्व के लिए सैनिक अधिकारीयों को सुसंगठित करना तथा साफ - सुधरा प्रशासन लागूं करना था। 

मध्यकालीन भारत के महत्वपूर्ण विदेशी यात्री

इब्नबतूता (मोरक्को का यात्री) था। जो 1333 से 1342 ईस्वी मुहम्मद तुगलक के शासनकाल में आया था। निकोलो कोण्टी (इटली का यात्री) था। जो 1420 से 1431 ईस्वी में देवराय प्रथम (विजयनगर) के शासनकाल में आया था।  अब्दुर्रज्जाक ईरान का राजदूत था जो 1442 से 1442 ईस्वी में देवराय द्वितीय (विजयनगर) के शासनकाल में आया था।

एडुआर्डो बारबोसा पुर्तगाली यात्री थे जो 1516 ईस्वी में कृष्ण देवराय (विजयनगर) के शासनकाल में आए थे। डोमिगोज पयाज पुर्तगाली पादरी थे। जो कृष्ण देव राय विजय नगर के शासन काल में आए थे। तथा कैप्टेन हॉकिंस अग्रेज यात्री जो पूर्वी भारत जहाँगीर के शासनकाल में आए थे। और सर टॉमस रो भी जहाँगीर के समय में ही आए थे। तथा हिन्दू मनसबदार औरंगजेब के शासन काल में आया था।

मुगलकालीन कला, वास्तुकला, संस्कृति एवं साहित्य

साहित्य

मुगलों की राजभाषा फ़ारसी थी। और अधिकांश साहित्य रचना फ़ारसी में ही हुई। तथा बाबर ने स्वयं 'बाबरनामा' या तुजके - बाबरी तथा दीवान की रचना की, बाबर ने बाबरनामा तुर्की में लिखा था पर मुगल दरबार की भाषा फ़ारसी थी। तथा बाबर ने अपने बाबरनामा में हिन्दू राज्य मेवाड़ का उल्लेख किया है। हुमायु की बहन गुलबदन बेगम ने हुमायु नामा की रचना की इसके एक भाग में बाबर का इतिहास तथा दूसरे भाग में हुमायु का इतिहास उल्लेखित है। तथा अकबर ने एक अनुवाद विभाग की स्थापना की थी।

तथा लीलावती (गणित की पुस्तक) फैजी ने फ़ारसी में अनुवाद किया एवं रामायण का बदायूनी तथा सहिंदी ने फ़ारसी में अनुवाद किया। और महाभारत का अनुवाद अकबर के काल में 'रज्मनामा' के नाम से बदायूनी, फैजी, तथा अबुल फजल के संयुक्त प्रयासों से हुआ था। और जहांगीर ने आत्मकथा तुजके जहांगीरी की रचना की थी। 
साथ ही अनुवादित ग्रंथों में भगवतगीता व योग वशिष्ट तथा उपनिषदों का अनुवाद दारा शिकोह ने कराया और दारा शिकोह ने मज्म - उल - बहरीन की रचना भी की। 

हिंदी साहित्य में भी रचना हुई

सूरसागर सूरदास
रामचरित मानस तुलसीदास
प्रेमवाटिका रसखान
  • तथा मुग़ल काल में उर्दू भाषा का विकास हुआ तथा उसे लश्करी भाषा भी कहा जाता है। 

मुगलकालीन प्रारंभिक निर्माण

निर्माण कार्य स्थान निर्माणकर्ता
दीनपनाह नगर दिल्ली हुमायूं
पुराना किला दिल्ली शेरशाह सूरी
शेरशाह का मकबरा सासाराम शेरशाह सूरी
हुमायूं का मकबरा दिल्ली हाजी बेगम
आगरा का किला आगरा अकबर
फतेहपुर सीकरी सीकरी अकबर

संगीत

औरंगजेब के अलावा अन्य सभी मुग़ल बादशाहों ने संगीत में रूचि दिखाई और अकबर स्वयं कुशल नक्कारा वादक था। उसके दरबार में अनेक गायक थे। जिसमे तानसेन अत्यधिक प्रसिद्ध था।

चित्रकला

जहाँगीर का शासनकाल चित्रकला का सबसे अच्छा समय माना जाता है। तथा बाबर और हुमायूं दोनों को चित्रकला से अनुराग था। जब हुमायूं ईरान के निर्वासन से वापस आया तो अपने साथ दो प्रसिद्ध चित्रकार मीर सैय्यद अली और ख्वाजा अब्दुरसमद को अपने साथ ले आया तथा अकबर कालीन प्रसिद्ध चित्रकार दशवंत,ख्वाजा, अब्दुरसमद,  मीर सैय्यद अली तथा दशवंत,व सावन थे। 

तथा मुग़ल सम्राटों में जहाँगीर को चित्रकला से सबसे अधिक अनुराग था। यदि एक ही चित्र को कई चित्रकार मिलकर बनाए तो वह बता सकता है। की उस चित्र में, कौन सा भाग किस चित्रकार ने बनाया है। 

अन्य महत्वूर्ण तथ्य

  • बाबर के अनुसार भारत में उसी ने सर्वप्रथम 1518 - 19 ईस्वी में भीरा के युद्ध में बारूद का प्रयोग किया था।
  • दिल्ली के लाल किले के, दीवान - ए - खास में फ़ारसी में कुछ शब्द लिखे है। जो कश्मीर के बारे में है। 
  • मुग़ल प्रशासन में मदद - ए - माश विद्वानों को दी जाने वाली राजस्व मुक्त भूमि थी। 
  • मुगलकाल में सूरत बंदरगाह को बाबुल मक्का द्वार कहा जाता है। 
  • अयोध्या स्तिथ बाबरी मस्जिद का निर्माण मीर बकी ने किया था। 
  • मुगलकालीन भारत में राज्य की आय का प्रमुख स्त्रोत भू - राजस्व था।
  • राबिया कद दौरानी का मकबरा द्वितीय ताजमहल कहलाता है।
  • अकबर ने सर्प्रथम कछवाहों (भारमल) से वैवाहिक संबंध स्थापित किए।

Post a Comment

0Comments

Do not post spam links in the comment box.

Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Accept !