bhartiya sansad ke karya evam shaktiyon ka varnan

Rajkumar Yadav
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 संसद के कार्य और शक्तियां का संक्षिप्त विवरण

bhartiya sansad ke karya evam shaktiyon ka varnan
संसद के कार्य और शक्तियां 

संसद भारत में एक केंद्रीय स्तिथि रखती है। और उसके बहुत सारे कार्य है। साथ ही उसे बहुत सारी शक्तियां भी प्राप्त है। तथा संसद की शक्तियों और कार्यों को निम्नलिखित रूप से वर्गीकृत किया जा सकता है। 
  1. विधाई शक्तियां एवं कार्य 
  2. कार्यकारी शक्तियां एवं कार्य 
  3. न्यायिक शक्तियां एवं कार्य 
  4. संवैधानिक शक्तियां एवं कार्य 
  5. अन्य शक्तियां एवं कार्य 

(1) विधाई शक्तियां एवं कार्य

भारतीय संसद का सबसे प्रमुख कार्य है। कानून बनाना, विधि बनाना है। तथा देश को समुचित रूप से संचालित करने के लिए संसद कानून बनाती है। संसद मुख्यता संघ सूची और अवशिष्ट सूची पर कानून बनाती है। परन्तु यदि दो या दो से अधिक राज्य के मध्य कोई विवाद है तो वह समवर्ती सूची पर भी कानून बना सकती है। तथा कुछ शर्तों के आधार पर संसद को, राज्य सूची में सम्मिलित विषयों पर भी कानून बनाने का अधिकार होता है। जैसे -
  • राष्ट्रपति शासन की स्तिथि में 
  • राष्ट्रीय आपातकाल की स्तिथि में 
  • संबंधित राज्य की स्तिथि में 
  • तथा दो तिहाई बहुमत से मत पारित हो जाने की स्तिथि में। 

(2) कार्यकारी शक्तियां एवं कार्य 

संसद की कार्यकारिणी पर प्रश्नकाल, सुनने काल, आधे घंटे की चर्चा, अल्प अवधि चर्चा, धयानाकर्षण प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव, के जरिए कार्यपालिका पर नियंत्रण रखना होता है। तथा संसद विभिन्न समितियों के माध्यम से कार्यपालिका के कार्यों का अधिक्षण करती है। जैसे - सरकारी आश्वासन समिति, याचिका समिति आदि।

(3) वित्तीय शक्तियां एवं कार्य 

संसद की सहमति के बिना, कार्यपालिका न ही किसी कार्य की उगाही कर सकती है। न ही कोई कर लगा सकती है। तथा संसद विभिन्न वित्तीय समितियों के माध्यम से सरकार के खर्चों की जाँच करती है। और उस पर नियंत्रण भी रखती है। यदि मंजूर किए गए धन को सरकार 1 वर्ष में खर्च नहीं कर पाती है। तो वह भारत की संचित निधि में चला जाता है। इस प्रक्रिया को " छास का सिद्धांत " कहते है। 

(4) संवैधानिक शक्तियां एवं कार्य

संसद में संविधान संशोधन की शक्ति निहित है। वह संविधान में किसी भी प्रावधान को जोड़ सकती है। तथा संविधान में संशोधन तीन प्रकार से कर सकती है। 
  • साधारण बहुमत द्वारा
  • विशेष बहुमत द्वारा
  • विशेष बहुमत और राज्य के विधान मंडलों की स्वीकृति के साथ।

(5) न्यायिक शक्ति एवं कार्य

संसद अपने सदस्यों तथा बाहरी लोगों को संसद की अवमानना तथा विशेषाधिकार के उल्लंघन के लिए दंड दे सकता है। तथा संविधान के उल्लंघन पर यह राष्ट्रपति को पद से हटा सकती है। यह उच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्याधीश व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को पद से हटा सकती है। किन्तु राष्ट्रपति की सिफारिस पर।

(6) निर्वाचक शक्तियां एवं कार्य

संसद राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेती है। और उपराष्ट्रपति को चुनती है। तथा संसद लोकसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को चुनती है।

(7) अन्य शक्तियां एवं कार्य

  • यह देश में विचार - विमर्श की सर्वोच्च इकाई है। 
  • यह राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दे पर बहस करती है। 
  • यह तीनों तरह की आपातकाल की स्वीकृति देती है। 
  • यह राज्य विधान मंडल की स्वीकृति से विधान परिषद् की समाप्ति का गठन कर सकती है। 
  • यह राज्य के क्षेत्र सीमा एवं नाम में परिवर्तन कर सकती है।

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