Rajya Ke Niti Nirdeshak Tatva In Hindi निति निर्देशक तत्व

Rajkumar Yadav
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राज्य के निति निर्देशक तत्व व  निति निर्देशक और मूल अधिकारों में अंतर

Rajya Ke Niti Nirdeshak Tatva In Hindi निति निर्देशक तत्व
राज्य के निति निर्देशक तत्व 

दोस्तों आज के इस लेख में हमने राज्य के निति निर्देशक तत्व, मूल अधिकार व निति निर्देशक तत्वों में टकराव एवं मूल अधिकार व निति निर्देशक तत्वों में अंतर के बारे में चर्चा की है। जोकि अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते है। यदि आप इसमें रुचि रखते है। और सटीक विवरण प्राप्त करना चाहते है। जो आज का यह लेख आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण शाबित होगा। क्योकि हमने राज्य के निति निर्देशक तत्व के बारे में विवरण बहुत ही सहज शब्दों में प्रस्तुत किया है।

हमारा उद्देश्य आपको स्पष्ट विवरण प्रदान करना है। ताकि आप परीक्षा में अच्छे से प्रदर्शन कर पाए।

राज्य के निति निर्देशक तत्व

राज्य के निति निर्देशक सिद्धांत भारतीय संविधान के भाग - 4 में A - 36 से 51 तक वर्णित है। एवं इन तत्वों को आयरलैंड के संविधान से ग्रहण किया गया है। व इनकी प्रकृति गैर - न्यायोचित अर्थात न्यायालय द्वारा लांगू नहीं किया जा सकता। तथा इनका उद्देश्य "लोक कल्याणकारी" राज्य का निर्माण करना है। एवं विधायिका और कार्यपालिका के लिए निर्देश है जो केवल नैतिक रूप से बाध्य है। अर्थात राज्य के निति निर्देशक सिद्धांतों को 3 भागों में विभाजित किया जा सकता है। 
  1. समाजवादी सिद्धांत 
  2. गांधीवादी सिद्धांत
  3. उदार बौद्धिक सिद्धांत

(1) समाजवादी सिद्धांत - (सामाजिक और आर्थिक न्याय)

लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय द्वारा सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करना और आय, प्रतिष्ठा सुविधाओं और अवसरों की असमानता को समाप्त करना। 

A - 38 (इसमें)

  • सभी नागरिकों को जीविका के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराना
  • सामूहिक हित के लिए समुदाय के भौतिक संसाधनों का समान वितरण
  • धन और उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण रोकना
  • पुरुषों और स्त्रियों को समान कार्य के लिए समान वेतन 
  • कर्मकारों के स्वास्थ्य और शक्ति तथा बालकों को अवस्था के दुरूपयोग से संरक्षण
  • बालकों को स्वास्थ्य विकास के अवसर A - (39) 42 वॉ संशोधन (1976)
समान न्याय एवं गरीबों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना A - (39) (क)
काम पाने के, शिक्षा पाने के, बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निःशक्तता की दशाओं में लोक सहायता पाने के अधिकार को संरक्षित करना A - (41)
  • काम की न्याय संगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध करना A - (42) 
  • सभी कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी श्रेष्ठ जीवन स्तर तथा सामाजिक और सांस्कृतिक अवसर A - (43) 
  • उद्योगों के प्रबंधन में कर्मकारों के भाग लेने के लिए कदम उठाना A - (43) (क) A 
  • पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करना और लोक स्वास्थ्य का सुधार करना A (47) 

(2) गांधीवादी सिद्धांत

  • ग्राम पंचायतों का गठन और उन्हें आवश्यक शक्तियां प्रदान कर स्वयं सरकार की इकाइयों के रूप में कार्य करने की शक्ति प्रदान करना A - (40)
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों व्यक्तिगत या सहकारी के आधार पर, कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन A (43) 
  • सहकारी समितियों के स्वैक्षिक गठन, स्वयं संचालन लोकतांत्रिक निमंत्रण एवं व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देना A (43) (B) 97 वॉ संशोधन (2011)
  • अनुसूचित जाति तथा जनजाति और समाज के कमजोर वर्गों के शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों को प्रोत्साहन और सामाजिक अन्याय और शोषण से सुरक्षा A (46) 
  • स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नशीली दवाओं, मदिरा, ड्रगस के औषधीय प्रयोजन से भिन्न उपभोग पर प्रतिबंध A (47)
  • गाय बछड़ा एवं अन्य दुधारू पशुओं की बलि पर रोक और उनकी नस्ल में सुधार को प्रोत्साहन A (48)

(3) उदार बौद्धिक सिद्धांत

  • भारत के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल सहिता A (44)
  • सभी बालकों को 14 वर्ष तक की आयु पूरी करने तक निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा A (45)
  • कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से करना A (48)
  • पर्यावरण का संरक्षण एवं संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा A (48) A
  • राष्ट्रीय महत्व वाले घोषित किए गए कलात्मक या ऐतिहासिक अभिरुचि वाले स्मारक या स्थान या वस्तु का संरक्षण करना A (49)
  • राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक रखना A (50)
  • अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि करना और राष्ट्र के बीच न्यायपूर्ण और सम्मान संबधों को बनाए रखना, अंतर्राष्ट्रीय विधि एवं बालिकाओं के प्रति आदर बढ़ाना और अंतर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटाने के लिए प्रोत्साहन देना A (51)

मूल अधिकार व निति निर्देशक तत्वों में टकराव

चंपाकम दोहीराज मामला 1951 में उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी की निर्देशक तत्व एवं मूल अधिकारों के बीच टकराव होने पर मूल अधिकार प्रभावी होंगे।
मिनर्वा मिल्स मामला 1980 में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने मूल अधिकारों को निति निर्देशक से उच्चतर बताया। लेकिन A - 14 एवं A - 19 द्वारा स्थापित मूल अधिकारों को A - 39 (B) एवं A - 39 (C) में बताए गए निति निर्देशक तत्वों के अधीनस्थ माना गया।

A - 39 B सामूहिक हित के लिए समुदाय के भौतिक संसाधनों का समान वितरण, A - 39 C धन और उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण रोकना।

मिनर्वा मिल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा की भारतीय संविधान की नीव "निति निर्देशक तत्व" एवं मूल अधिकारों के संतुलन के बीच में रखी गई है। फिर भी टकराव की स्तिथि में मूल अधिकार उच्चतर होंगे।

राज्य के निति निर्देशक तत्व तथा मूल अधिकारों में अंतर

निति निर्देशक तत्व एवं मूल अधिकार दोनों एक दूसरे के पूरक है। पर फिर भी कुछ फर्क है। 

मूल अधिकार

निति निर्देशक तत्व

मूल अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है। जबकि निति निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है।
मूल अधिकार की प्रकृति नकारात्मक है। जबकि निति निर्देशक तत्व की प्रकृति सकारात्मक है।
मूल अधिकार व्यक्तियों से सम्बंधित है। जबकि निति निर्देशक तत्व राज्य से सम्बंधित है।
मूल अधिकार का मूल उद्देश्य है - राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना। जबकि निति निर्देशक तत्व का - सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र और कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।
आपातकाल के समय मूल अधिकार को निलम्बित किया जा सकता है। जबकि निति निर्देशक तत्वों को निलम्बित नहीं किया जा सकता है।
मूल अधिकार पूर्ण नहीं है। क्योकि जगह - जगह पर इस पर निर्बंधन लगाया गया है। जबकि निति निर्देशक तत्व पर कोई निर्बंधन नहीं लगा है।

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