Hame Samvidhan Ki Jarurat Kyu Hai ! Samvidhan Sanshodhan In Hindi

Rajkumar Yadav
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 हमें संविधान की जरुरत क्यों है ? संविधान संशोधन की प्रक्रिया, संशोधन के प्रकार

Hame Samvidhan Ki Jarurat Kyu Hai ! Samvidhan Sanshodhan In Hindi
संविधान की जरुरत क्यों है ? संविधान संशोधन 

दोस्तों हमारे द्वारा आपको एमपीपीएससी, यूपीएससी एवं अन्य परीक्षाओं की तैयारी के दृष्टिकोण से उन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की जा रही है। जो की अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते है। आज के लेख में हमने, मूल रूप से नीचे दिए गए विषयों पर चर्चा की है।
  • हमें संविधान की जरुरत क्यों है  ? 
  • संविधान संशोधन क्या है  ? 
  • संविधान संशोधन की प्रक्रिया क्या है ? 
  • संशोधन किसे कहते है  ? 
  • संशोधन के प्रकार क्या है ? 

हमें संविधान की जरुरत क्यों है ? 

संविधान लिखित नियमों की ऐसी किताब है जिसे किसी देश में रहने वाले सभी लोग सामूहिक रूप से मानते है। संविधान सर्वोच्च कानून है। जिससे किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगो (जिन्हे नागरिक कहा जाता है ) के, बीच के आपसी संबंध तय होने के साथ - साथ लोगों और सरकार के बीच के संबंध भी तय होते है। जैसे - 
  • (1) पहला - यह साथ रह रहे विभिन्न तरह के लोगो के बीच जरुरी भरोसा और सहयोग विकसित करता है। 
  • (2) दूसरा - यह स्पष्ट करता है की सरकार का गठन कैसे होगा और किसे फैसले लेने का अधिकार होगा। 
  • (3) तीसरा - यह सरकार के अधिकारों की सीमा तय करता है। और हमें बताता है की नागरिकों के क्या अधिकार है। 
  • (4) चौथा - यह अच्छे समाज के गठन के लिए लोगो की आकांक्षाओं को व्यक्त करता है।

संविधान संशोधन

संविधान के भाग 20 एवं A - 368 में वर्णित है। भारत में संविधान संशोधन की प्रक्रिया न तो ब्रिटेन के समान अत्याधिक लचीली है ना ही अमेरिका के समान अत्यधिक कठोर है। अर्थात यह दोनों का समिश्रण है। परन्तु संविधान की कुछ व्यवस्थाओं को संशोधित नहीं किया जा सकता जिन्हे हम मूल ढांचा भी कहते है। यह मूल ढांचे की व्यवस्था उच्चतम न्यायालय द्वारा केशवानंद भारती मामला 1973 में दी गई।

संविधान संशोधन की प्रक्रिया

  1. संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पुर स्थापित किया जा सकता है। किन्तु (विधानमंडल में नहीं)
  2. संशोधन विधेयक को सरकारी या गैर सरकारी सदस्य स्थापित कर सकता है। 
  3. इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक नहीं है।
  4. दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होना आवश्यक है। 
  5. यदि विधेयक संघीय व्यवस्था में संशोधन के उद्देश्य से लाया गया है। तो आधे राज्यों के विधान मंडलों में भी सामान्य बहुमत से विधेयक पारित होना आवश्यक है। 
  6. दोनों सदनों में मतभेद होने पर संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है। 
  7. दोनों सदनों में विधेयक का पास होने पर राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा जाता है। 
  8. राष्ट्रपति विधेयक पर सहमति देने के लिए बाध्य है। राष्ट्रपति न तो विधेयक को अपने पास रख सकते है। और ना ही संसद के पास पुर्नविचार के लिए भेज सकते है। 
  9. राष्ट्रपति की सहमति के बाद यह संविधान संशोधन अधिनियम कहलाता है। अर्थात (24 वे संविधान संशोधन 1971 द्वारा राष्ट्रपति को संविधान संशोधन विधेयक पर सहमति देने के लिए बाध्य किया गया)

संशोधन क्या है ? 

संविधान में नए प्रावधानों को सम्मिलित करना या प्रावधानों को हटाना संविधान संशोधन कहलाता है। अत: भारतीय संविधान में भी परिस्थितियों व आवश्यकता अनुसार संशोधन किया जा सकता है।  A - 368 के तहत केवल भारतीय संसद ही संविधान में संशोधन कर सकती है।

संशोधन के प्रकार

भारतीय संविधान में संशोधन मुख्य रूप से तीन प्रकार से हो सकता है -

(1) संसद के साधारण बहुमत द्वारा - अर्थात संसद में उपस्तिथ सदस्यों व मतदान करने वालों के 50 % (1/2) से अधिक सदस्य ही सामान्य या साधारण बहुमत से संशोधन कर सकते है। तथा किन क्षेत्रों में इस प्रक्रिया के दौरान संशोधन किया जा सकता है। वे निम्नलिखित है -
  • नए राज्यों का प्रवेश अथवा गठन। 
  • राज्यों का पुनर्गठन या क्षेत्र विस्तार। 
  • संसद सदस्यों के वेतन अथवा भत्ते में।
  • नागरिकता के प्रावधान में।
  • केंद्रशासित प्रदेशों हेतु प्रावधानों में। 
  • निर्वाचन क्षेत्रों का विस्तार आदि
(2) संसद के विशेष बहुमत द्वारा - प्रत्येक सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और प्रत्येक सदन के उपस्तिथ और मतदान करने वाले सदस्यों के 2 / 3 (दो तिहाई) बहुमत द्वारा भारतीय संविधान में संशोधन किया जा सकता है। अत: किन क्षेत्रों में विशेष बहुमत द्वारा संशोधन किया जा सकता है। वे निम्नलिखित है -
  • मूल अधिकारों (नागरिकों के)
  • राज्यों के निति निर्देशक तत्वों में। 
  • वे सभी उपबंध जो प्रथम और तृतीय श्रेणी के संशोधन विधि में शामिल न हो। 
अत: इसी प्रकार से दूसरे सदन में यह प्रक्रिया होगी। तत्पश्चात विधेयक दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति के पास जाएगा। व राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही, संविधान में संशोधन माना जाएगा। 
  • नोट - संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। 
(3) संसद के विशेष बहुमत व आधे से अधिक राज्यों की स्वीकृति द्वारा - इस प्रक्रिया में विधेयक पहले संसद के विशेष बहुमत से पारित होगा। तत्पश्चात उस विधेयक को राज्य भी अपने विधानमण्डल में विशेष बहुमत से, उसी प्रक्रिया द्वारा जिस प्रक्रिया द्वारा संसद ने पारित किया वे पारित करेंगे। 
अत: आधे से अधिक राज्यों द्वारा व संसद द्वारा पारित होने पर संविधान संशोधन मान्य होगा। व इस प्रक्रिया में निम्नलिखित क्षेत्र सम्मिलित होंगे -
  • राष्ट्रपति का निर्वाचन व इसकी प्रक्रिया। 
  • संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व।
  • संशोधन करने की संसद, की शक्ति में संशोधन (A - 368)
  • 7 वीं अनुसूची से सम्बंधित कोई विषय। 
  • केंद्र व राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन। 
  • उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय। 
  • केंद्र / राज्य की कार्यकारिणी की शक्तियों का विस्तार। 
नोट - A - 368 के तहत मात्र 02 प्रकार के संविधान संशोधन का उल्लेख है। 
  • संसद द्वारा विशेष बहुमत से। 
  • संसद व आधे से अधिक राज्यों के विशेष बहुमत की स्वीकृति से। अर्थात (साधारण बहुमत का उल्लेख नहीं है।)

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