वनों पर आधारित उद्योग एवं मध्यप्रदेश में उद्योगों के विकास के लिए निर्मित संस्थाएँ
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| वनों पर आधारित उद्योग |
आज हम इस लेख में बेहद महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने जा रहे है। वनों पर आधारित उद्योगों के बारे में। जिससे आपके ज्ञान में बढ़ोतरी तो होगी ही। वरन विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को भी मदद मिलेगी। क्योकि देखा गया है कि वनों पर आधारित उद्योगों के विषय पर कई प्रश्न परीक्षाओं में पूछे जाने की संभावनाएँ बनी रहती है। हमने नीचे दिए गए विवरण को बतौर बिंदुवार समझाने का प्रयास किया है। जिनमे मुख्य रूप से वनों पर आधारित उद्योगों के नाम है -
- कागज उद्योग
- बीड़ी उद्योग
- लकड़ी उद्योग
- कत्था उद्योग
- लाख उद्योग
- चीप एवं माचिस डिब्बी उद्योग
- हथकरघा उद्योग
- रेशम उद्योग
और मध्यप्रदेश में उद्योगों के विकास हेतु निर्मित संस्थाएँ जैसे - मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम, मध्यप्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम (भोपाल), मध्यप्रदेश राज्य उद्योग निगम, मध्यप्रदेश वित्त निगम, मध्यप्रदेश लघु उद्योग एवं मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोउद्योग बोर्ड जिनमे -
- मध्यप्रदेश हेंडलूम संचालनालय
- मध्यप्रदेश राज्य वस्त्र निगम
- मध्यप्रदेश हस्तशिल्प विकास निगम
- मध्यप्रदेश विकास निगम
आदि सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई है जिसका विवरण निम्नलिखित है -
वनों पर आधारित उद्योग
प्रदेश के कुल भौगिलिक क्षेत्रफल के लगभग 30.72 प्रतिशत वन पाए जाते है। तथा राज्य में वन आधारित उद्योग का पर्याप्त विकास नहीं हुआ है। क्योकि वन संरक्षण को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है - प्रदेश में वन आधारित प्रमुख उद्योग निम्नलिखित है -
(1) कागज उद्योग - राज्य में कागज उद्योग की स्थापना सर्वप्रथम 1956 में की गई थी। जब खंडवा में नेपा नगर में, नेशनल न्यूज प्रिंट एन्ड पेपर मिल की स्थापना की गई थी। तथा वर्तमान में राज्य में 9 कागज बनाने वाले संयंत्र पंजीकृत है। जो विविध प्रकार के कागज बनाते है। व राज्य में शहडोल जिले के अमलाई स्थान पर निजी क्षेत्र में स्थापित ओरिएन्ट पेपर मिल सबसे प्रमुख है। तथा राज्य में सलाई की लकड़ी एवं अन्य अन्य कच्चा माल पर्याप्त होने के कारण, कागज उद्योग का विकास हुआ है। तथा अखबारी कागज का कारखाना बुरहानपुर जिले में स्तिथ है व इंदौर में महीन कागज तथा होशंगाबाद में नोट बनाने के कागज का कारखाना है। व नोट बनाने अथवा नोट की प्रिंटिंग का कारखाना देवास में है।
(2) बीड़ी उद्योग - प्रदेश में तेंदूपत्ता का संग्रहण देश में सर्वाधिक होता है। यही करन है कि बीड़ी उद्योग का विकास जबलपुर, सागर, कटनी, दमोह, तथा सतना में हुआ है। तथा प्रदेश में बीड़ी बनाने के लगभग 260 कारखाने कार्यरत है। और इस उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र जबलपुर है।
(3) लकड़ी उद्योग - लकड़ी उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र जबलपुर है। इसके अलावा राज्य के छिंदवाड़ा तथा मंडला में इमारती लकड़ी को चीरने के कारखाने कार्यरत है। तथा वर्तमान में लगभग 113 कारखाने प्रदेश में इस उद्योग में लगे हुए है।
(4) कत्था उद्योग - खेर वृक्ष से कत्था बनाने का कार्य पूर्वी मध्यप्रदेश की खेरवार जनजाति द्वारा किया जाता है। तथा शिवपुरी एवं बानमोर में भी कत्था उत्पादक इकाइयां उत्पादन कर रही है।
(5) लाख उद्योग - राज्य के विन्ध क्षेत्र में लघु उद्योग का केन्द्रीकरण है। तथा कच्चे लाख से सीड लाख बनाने का शासकीय कारखाना उमरिया में है।
(6) चीप एवं माचिस डिब्बी उद्योग - चिप बोर्ड एवं पार्टिकल बोर्ड बनाने का कारखाना इटारसी में तथा माचिस की डिब्बी बनाने का कारखाना ग्वालियर में स्थापित है।
(7) हथकरघा उद्योग - हथकरघा उद्योग परंपरागत एवं कलात्मक वस्तुओं के उत्पादन के साथ - साथ प्रदेश के बुनकरों को रोजगार उपलब्ध कराता है। तथा वर्ष 2008 - 2009 में राज्य में कुल 34 . 7 हजार स्थापित हथकरघा में से 23 . 3 हथकरघे कार्य कर रहे है।
(8) रेशम उद्योग - वर्तमान में मध्यप्रदेश के लगभग 26 जिलों में रेशम उद्योग की गतिविधियां संचालित है। तथा रेशम उद्योग के अंतर्गत वर्ष 2008 - 2009 में मलबरी कोया उत्पादन में, तथा प्राकृतिक रेशम के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 1984 में, रेशम संचालनालय की स्थापना की गई।
मध्यप्रदेश में उद्योगों के विकास हेतु निर्मित संस्थाएँ
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम - औद्योगिक विकास को तेज करने के लिए सन 1965 में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम का गठन किया गया था। तथा इसका मुख्यालय भोपाल में है। और इसका मुख्य उद्देश्य ग्रहण एवं माध्यम उद्योगों के लिए अधोसंरचना विकसित करते हुए उन्हें दीर्घकालीन ऋण, अंशपूंजी एवं भागीदारी प्रदान करना है। और इन निगमों के कार्यालय भोपाल, इंदौर, रीवा, जबलपुर, तथा ग्वालियर में कार्यरत है। इन निगमों के अंतर्गत आने वाले विकास केंद्रों में 245 वृहद एवं माध्यम तथा 1 . 12 हजार उद्योग स्थापित है।
(1) मध्यप्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम (भोपाल) - भारतीय कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत दिनांक 16 अक्टुम्बर 1987 को औद्योगिक केंद्र विकास निगम (भोपाल) का गठन हुआ था। और इस निगम को इसके क्षेत्राधिकार में औद्योगिक विकास केंद्रों की स्थापना के माध्यम से औद्योगिक विकास का उत्तरदायित्व सौपा गया है। तथा निगम के अधीन निम्न औद्योगिक विकास केंद्र / फूडपार्क स्थापित है। जैसे -
- औद्योगिक विकास केंद्र - मंडीदीप फेस - I, मंडीदीप फेस - II, जिला - रायसेन में है।
- औद्योगिक विकास केंद्र - पीलूखेड़ी, जिला राजगढ़
- फूडपार्क - पिपरिया - बाबई जिला होशंगाबाद
- विशेष शिक्षा जोन - अचारपुरा, जिला भोपाल
- औद्योगिक क्षेत्र MSME - अचारपुरा जिला भोपाल
- इंडस्ट्रियल एरिया अ - बागरोदा जिला भोपाल
- इंडस्ट्रियल एरिया ब - जांबर बागरी, जिला विदिशा
अन्य परियोजनाएं
- औद्योगिक क्षेत्र मोहासा - बाबई जिला होशंगाबाद
- औद्योगिक क्षेत्र कीरतपुर - जिला होशंगाबाद
- प्लास्टिक पार्क - तामोट जिला रायसेन
(2) मध्यप्रदेश राज्य उद्योग निगम - इसकी स्थापना 1969 में भोपाल में हुई। इसका प्रमुख कार्य राज्य में सहकारी उद्योगों के संचालन के साथ ही संयुक्त क्षेत्र के उद्योगों को सहायता प्रदान करना है।
(3) मध्यप्रदेश वित्त निगम - इसकी स्थापना 30 जून 1955 में इंदौर में की गई है। और इसका प्रमुख कार्य निजी व सरकारी क्षेत्र में स्थापित होने वाले उद्योगों में वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
(4) मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम - इसकी स्थापना 1961 में भोपाल में हुई। मुख्य रूप से इसका काम उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराना तथा उनके तैयार माल को बाजार में खपाना है।
मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोउद्योग बोर्ड
वर्ष 1978 में मध्यप्रदेश ग्रामोउद्योग अधिनियम 1978 स्थापित किया बाद में इसमें संशोधन कर, मध्यप्रदेश ग्रामोउद्योग अधिनियम 1979 के अंतर्गत "मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोउद्योग बोर्ड" का गठन किया गया। तथा मई 1990 से मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोउद्योग बोर्ड कुटीर एवं ग्रामोउद्योग विभाग के घटक के रूप में कार्यरत है। जबकि इसके पहले वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के घटक के रूप में कार्यरत था। व इसके उद्देश्य निम्नलिखित है -
- सामाजिक उद्देश्य - ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना
- आर्थिक उद्देश्य - बेचने योग्य सामाग्री का उत्पादन करना
- व्यापक उद्देश्य - प्रदेश वासियों को आत्मनिर्भर बनाना और एक सुदृंढ ग्रामीण सामाजिक भावना का निर्माण करना।
(1) मध्यप्रदेश हेंडलूम संचालनालय - इसकी स्थापना 1976 में भोपाल में की गई थी। तथा यह निगम औद्योगिक सहकारी समितियों की स्थापना के साथ ही उनके लिए पूंजी की व्यवस्था करता है। तथा उनके विकास में सहयोग देता है।
(2) मध्यप्रदेश राज्य वस्त्र निगम - वर्ष 1976 - 77 से हथकरघा उद्योग के विकास उत्पादन एवं संवर्धन के लिए प्रयासरत है। तथा इस निगम के द्वारा, बुनकरों के लाभ के लिए विकासात्मक एवं व्यवसाहिक कार्यक्रम संचालित किए जाते है।
(3) मध्यप्रदेश हस्तशिल्प विकास निगम - हस्तशिल्प विकास निगम की स्थापना 1981 में मध्यप्रदेश के एक उपक्रम के रूप में की गई थी। और निगम की स्थापना का मुख्य उद्देश्य हस्तशिल्प की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
(4) मध्यप्रदेश निर्यात निगम - इसकी स्थापना 1977 में की गई थी। जिसका मुख्यालय भोपाल में है। तथा यह प्रदेश में उत्पादित वस्तुओं के निर्यात उद्योग के लिए कच्चे माल के आयात एवं स्थानीय व्यापार के उद्देश्य से बनाया गया है।

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