साक्षात्कार के सन्दर्भ में भ्रम एवं प्रशासनिक अधिकारी के गुण
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| qualities of an administrative officer |
आज हम साक्षात्कार के सन्दर्भ में भ्रम एवं प्रशासनिक अधिकारी के गुणों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। अक्सर उम्मीदवारों द्वारा साक्षात्कार को लेकर कई प्रकार की नकारात्मक सोच पालते रहते है। जबकि साक्षात्कार सभी वर्गों के उम्मीदवारों के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया होती है। जोकि एक समान सभी छात्रों पर लांगू होती है। नीचे साक्षात्कार के सन्दर्भ में भ्रम निम्नलिखित है -
साक्षात्कार के सन्दर्भ में भ्रम
- साक्षात्कार में कुछ बोर्ड हिंदी माध्यम के छात्रों के साथ भेदभाव करते है।
- प्रश्न अधिकतर अंग्रेजी में पूछे जाते है। और उम्मीदवार पर अंग्रेजी में उत्तर देने के लिए दबाव डाला जाता है।
- साक्षात्कार बोर्ड का उद्देश्य लोगों को छांटना होता है। न कि लोगों का चयन करना। अत: वे ज्यादा से ज्यादा कठिन प्रश्न पूछकर उम्मीदवार पर दबाव डालते है।
प्रशासनिक अधिकारी के गुण
वर्तमान में जिन जटिल परिस्थितियों में एक प्रशासनिक अधिकारी को कार्य करना पड़ता है। उन्होंने UPSC के सामने यह चुनौती उत्पन्न कर दी है। कि वह कैसे योग्यतम लोगो का चुनाव इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए करे। एक तरफ जहाँ प्रशासनिक अधिकारीयों को राजनीतिक रूप में जाग्रत किन्तु सामाजिक - आर्थिक रूप से पिछड़ी जनता की अपेक्षाओं का बोझ उठाना पड़ता है। वहीँ संसाधनों की सीमितता तथा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच निष्पक्ष एवं तटस्थ होकर राज्य द्वारा प्रदत्त सेवाओं को जनता तक पहुँचाना होता है। दूसरी तरफ वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के इस युग में राज्य की भूमिका को संकुचित किया जा रहा है। और आर्थिक विकास में नौकरशाही एक बड़ी बाधा मानी जा रही है।
ऐसे में इन जटिल परिस्थितियों में एक प्रशासनिक अधिकारी में कुछ विशिष्ट गुणों की अपेक्षा की जाती है।
- स्पष्ट और तर्कसंगत अभिव्यक्ति की क्षमता
- संतुलित निर्णय लेने की क्षमता
- मानसिक सुदृंढता
- बौद्धिक एवं नैतिक ईमानदारी
- सामाजिक संगठन की योग्यता
- सामाजिक संवेदनशीलता
- सकारात्मक दृष्टिकोण एवं भविष्य की सुन्दर रुपरेखा
- प्रतिकूल परिस्तिथि में भी सहज रहने की योग्यता
- आत्मविश्वास
- समस्या को समग्रता से देखने की प्रवृत्ति
- आलोचनात्मक ग्रहण शक्ति
अत: भर्ती एवं प्रशिक्षण के माध्यम से इन गुणों को विकसित किया जा सकता है। लेकिन वर्तमान जटिलताओं में यह अपेक्षा की जाती है। कि ये विशिष्ट एवं मूलभूत गुण अभ्यर्थी में पहले से विद्यमान होंगे। वर्तमान में अब ऐसे अधिकारीयों की खोज की जा रही है। जो न केवल जनता की संवेदनात्मक अपेक्षाओं को समझ सके। बल्कि बदलती आर्थिक - सामाजिक राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार देश को सकारात्मक गतिशीलता भी दे सके।
लोकसेवक के इन विशिष्ट गुणों को परखने के लिए साक्षात्कार बोर्ड के समक्ष औसतन तीस मिनट का समय होता है। ऐसे में साक्षात्कार बोर्ड के समक्ष यह चुनौती रहती है। कि वह कैसे इतने कम समय में एक योग्य प्रशासनिक अधिकारी का चुनाव करे। इसलिए वह तथ्यात्मक प्रश्नों व विषयगत प्रश्नों पर लगभग नगण्य सवाल पूछते है। प्रश्नों का स्वरूप सामान्यता निम्न रहता है -
(1) अभिरुचि पर प्रश्न - किसी व्यक्ति की अभिरुचियाँ उसके व्यक्तित्व का आइना होती है। क्योकि अभिरुचियों के माध्यम से व्यक्ति की विविधता एवं गहराई, सामाजिक संवेदनशीलता जैसे गुणों का पता चलता है। अधिकतर बोर्ड अभिरुचियों से ही प्रश्नों की शुरुआत करते है। इससे एक तरफ तो वे उम्मीदवार को सहज होने का मौका देते है। तो दूसरी तरफ वह उपरोक्त गुणों को भी परखने का प्रयास करते है।
(2) अंतराष्ट्रीय व राजनीतिक घटनाएं - इस प्रकार के प्रश्नों की प्रवृत्ति मुख्य रूप में अवधारणात्मक होती है। और विषय वस्तु में क्रमशः प्रश्नों को पूछकर प्रवेश किया जाता है। इस प्रकार के प्रश्नों से उम्मीदवार की मानसिक सतर्कता, भविष्य के प्रति सकारात्मक तथा संतुलित दृष्टिकोण आदि का परीक्षण किया जाता है। इन प्रश्नों के उत्तर देते समय उम्मीदवार से संक्षिप्त एवं विश्लेषणात्मक पद्धति की अपेक्षा रखी जाती है। साथ ही यह भी देखा जाता है। कि उम्मीदवार किसी घटना को समग्रता से देखने का प्रयास करता है अथवा उसके किसी एक पहलू को।
(3) हाइपोथीटिकल / सिचुएशनल प्रश्न - यदि आपका चयन सिविल सेवा में नहीं होता है। तो आप क्या करेंगे ? यदि आपको किसी जिले का डी0एम बना दिया जाए। तो आपकी पहली प्राथमिकता क्या होगी ? जैसे प्रश्न पूछ लिए जाते है। याद रहे इन प्रश्नों के माध्यम से उम्मीदवार की सामाजिक संवेदनशीलता एवं उम्मीदवार की नजर में समस्याओं की प्राथमिकता एवं समस्या के समाधान के प्रति उसके सकारात्मक दृष्टिकोण को देखने का प्रयास किया जाता है।
(4) विषयगत प्रश्न - सामान्यता उम्मीदवारों को दो प्रकार के समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
- सामान्य शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले
- तकनीकी एवं व्यवसाहिक शिक्षा वाले
सामान्य शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों से उनके विषय की प्रासंगिकता सिविल सेवा के सन्दर्भ में पूछी जाती है। जैसे - दर्शनशास्त्र आपके एक अच्छे लोक प्रशासक बनने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है ? अथवा इतिहास की प्रशासन में क्या उपयोगिता है ? दूसरी तरफ तकनीकी सेवा वाले उम्मीदवारों से निम्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते है जैसे -
- तकनीकी योग्यता रखने के बावजूद आप सिविल सेवा में क्यों आना चाहते है ?
- सिविल सेवा में इस तकनीकी योग्यता की क्या उपयोगिता है ?
इस प्रकार के प्रश्नों को पूछने का उद्देश्य उम्मीदवार की बौद्धिक एवं नैतिक ईमानदारी, आलोचनात्मक, ग्रहणशक्ति, अतीत से प्रेरणा एवं प्रतिकूल परिस्तिथियों में भी अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखने की योग्यता का परीक्षण करना होता है।
साक्षात्कार उम्मीदवार व्यक्तित्व का परीक्षण करता है। और व्यक्तित्व का विकास एक दीर्घकालीन प्रक्रिया है। अत: हमें अपने व्यक्तित्व को सिविल सेवा के अनुरूप ढालने का प्रयास करना चाहिए।
क्या करे ?
(1) तैयारी करने का प्रथम चरण है स्वयं पर विश्वास। स्वयं पर विश्वास करने के लिए आवश्यक है कि आपका दृष्टिकोण जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक हो। याद रखे यदि प्रशासनिक अधिकारी समाधान का हिस्सा नहीं है। तो वह स्वयं में सबसे बड़ी समस्या है। अत: आवश्यक है कि जब भी आप अपने गांव, शहर, जिला, राज्य या देश की मुख्य समस्याओं को समझने का प्रयास करे, तो आपने मन में इन समस्याओं का समाधान भी स्पष्ट होना चाहिए।
(2) तैयारी करने के चरण में साक्षात्कार की तैयारी करने वाले छात्र - छात्राओं का ग्रुप बनाया जाना चाहिए। इस समूह में समसामयिक विषयों पर वाद - विवाद आयोजित कराया जाना चाहिए। इसके अलावा कृत्रिम साक्षात्कार भी बार - बार आयोजित कराया जाना चाहिए। जिससे अभ्यर्थी बोलने के क्रम में भाषागत अशुद्धियों एवं घबराहट से बाहर निकल सके। कृत्रिम साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थी इसे रिकॉर्ड भी कर सकते है। और अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास कर सकते है। क्योकि सामान्यता ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के कारण उन्हें विशिष्ट लोगों के सामने प्रस्तुति का मौका नहीं मिलता।
(3) वाद - विवाद और परिचर्चाओं में इस बात का ध्यान रखना चाहिए। कि एक प्रशासनिक अधिकारी से सभी को साथ लेकर चलने की योग्यता की अपेक्षा रखी जाती है। इसलिए अपनी बातों को तर्कपूर्ण रखना सीखिए तो दूसरों की बातों को भी ध्यान से सुनने का प्रयास करिए।
(4) सुनना नेतृत्व का एक विशिष्ट गुण माना जाता है। क्योकि जब आप किसी को सुनते है। तो इसका अर्थ है। कि आप अन्य लोगों के विचारों को भी स्वीकार्य करते है। सिविल सेवा के अभ्यर्थियों को इस कला को स्वयं में विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। याद रखे कि साक्षात्कार के समय यदि आप प्रश्नकर्ता से कई बार प्रश्नों को दोहराने के लिए कहते है, तो इसका अर्थ है कि आप में मानसिक सतर्कता का आभाव है।
(2) तैयारी करने के चरण में साक्षात्कार की तैयारी करने वाले छात्र - छात्राओं का ग्रुप बनाया जाना चाहिए। इस समूह में समसामयिक विषयों पर वाद - विवाद आयोजित कराया जाना चाहिए। इसके अलावा कृत्रिम साक्षात्कार भी बार - बार आयोजित कराया जाना चाहिए। जिससे अभ्यर्थी बोलने के क्रम में भाषागत अशुद्धियों एवं घबराहट से बाहर निकल सके। कृत्रिम साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थी इसे रिकॉर्ड भी कर सकते है। और अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास कर सकते है। क्योकि सामान्यता ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के कारण उन्हें विशिष्ट लोगों के सामने प्रस्तुति का मौका नहीं मिलता।
(3) वाद - विवाद और परिचर्चाओं में इस बात का ध्यान रखना चाहिए। कि एक प्रशासनिक अधिकारी से सभी को साथ लेकर चलने की योग्यता की अपेक्षा रखी जाती है। इसलिए अपनी बातों को तर्कपूर्ण रखना सीखिए तो दूसरों की बातों को भी ध्यान से सुनने का प्रयास करिए।
(4) सुनना नेतृत्व का एक विशिष्ट गुण माना जाता है। क्योकि जब आप किसी को सुनते है। तो इसका अर्थ है। कि आप अन्य लोगों के विचारों को भी स्वीकार्य करते है। सिविल सेवा के अभ्यर्थियों को इस कला को स्वयं में विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। याद रखे कि साक्षात्कार के समय यदि आप प्रश्नकर्ता से कई बार प्रश्नों को दोहराने के लिए कहते है, तो इसका अर्थ है कि आप में मानसिक सतर्कता का आभाव है।
(5) आपके व्यक्तित्व के आंतरिक पहलुओं अर्थात आपके ज्ञान, आचार - विचार तथा व्यवहार को प्रकट करने का सबसे सशक्त माध्यम आपकी संप्रेषण कला है। आपकी संप्रेषण क्षमता अर्थात अभिव्यक्ति की शैली को सुधारने के लिए प्रारंभ से ही प्रयास करना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि आप भाषा में शब्द चयन, अशुद्धियों, बोलते समय प्रवाह आदि का विशेष ध्यान रखे। ध्यान रहे अंग्रेजी या हिंदी में बोलने का असर नहीं पड़ता लेकिन अपने विचारों को तर्कपूर्ण एवं प्रभावशाली तरीके से रखने का प्रभाव जरूर पड़ता है।
(6) अपने बायोडाटा तथा समसामयिक प्रश्नों पर पहले से ही अलग - अलग सीरीज बना लें। उसके बाद में प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लिख ले। जिससे भाषायी स्तर पर प्रश्नों के उत्तर में शुद्धता बनी रहे। बाद में शीशे के सामने प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करे।
(7) ध्यान रहे बोलने के क्रम में क्षेत्रीय प्रभाव एक सामान्य बात है। और साक्षात्कार बोर्ड भी इसे सहर्ष स्वीकार करता है। अत: इसके संबंध में परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
(8) राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय विषय पर समाचार - पत्र, पत्रिकाओं का अध्ययन करना एवं नोट्स बनाना शुरू कर दे। इस संबंध में अपने मौलिक विचारों को विकसित करने का प्रयास करे। याद रखे इस प्रकार के नोट्स बनाते समय आपके साक्षात्कार से एक - महीने पूर्व के राष्ट्रीय समाचार - पत्र बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
(9) बॉडी लैंग्वेज से संबंधित मनोविज्ञान की पुस्तकों को अवश्य पढ़ने का प्रयास करे। तथा इनमे से सकारात्मक बातों या आदतों को अपनी आम दिनचर्या में शामिल करने का प्रयास शुरू करे।
साक्षात्कार के समय
- कपडे अपने व्यक्तित्व के अनुरूप पसंद करे। कपडे ऐसे होने चाहिए। जिनमे सौम्यता झलकती हो और आप उनमे आरामदायक महसूस करे।
- समय से पहुँच कर कागजी कार्यवाही पूरी कर लें।
- इंतजार करते समय सहभागियों के साथ सामान्य बातचीत अवश्य करे क्योकि अकेले में आप नर्वस हो सकते है। लेकिन याद रखे कि नकारात्मक बातों पर वाद - विवाद न करे।
साक्षात्कार हेतु विशिष्ट दृष्टिकोण की आवश्यकता क्यों ?
यहाँ सहज ही प्रश्न उठता है क़ि आखिर क्यों माना जाता है। कि सिविल सेवा अभ्यर्थियों को एक विशिष्ट दृष्टिकोण का निर्माण करना है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण है।
- पहला तो यह कि अधिकतर विद्यार्थी जिस सामाजिक - शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आते है। उसमे उन्हें अपने व्यक्तित्व के विकास का पूर्ण अवसर नहीं मिलता है। और
- दूसरा जाति धर्म, स्त्रियों के प्रति दुराग्रह आदि इनमे से अधिकांश विद्यार्थियों की मानसिकता में व्याप्त रहता है।
सामान्यता एक समग्र स्तर पर समाज की समझ का भी आभाव होता है। जो इनकी रचनात्मकता एवं सकारात्मकता को बाधित करता है। मॉक साक्षात्कार का उद्देश्य भी न केवल उपर्युक्त दो कारकों के सन्दर्भ में इनकों शिक्षित करने से जुड़ा है। अपितु इनके विचारों को विस्तृत आयाम देना भी है। मॉक इंटरव्यू के जरिए समाज के अधिकतम बड़े क्षेत्रों एवं समूहों की प्राथमिकता एवं मौलिक सूचना तथा स्तिथि उनके सामने आती है। जिससे अभ्यर्थियों के दृष्टिकोण का विकास होता है।

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