ज्ञान भारतम मिशन (Gyan Bharatam Mission): भारत की ज्ञान परंपरा और पांडुलिपियों का संरक्षण
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| Gyan Bharatam Mission: Preservation of India's knowledge tradition and manuscripts |
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) द्वारा देश की प्राचीन पांडुलिपियों (Manuscripts) और ज्ञान विरासत को सहेजने के लिए ज्ञान भारतम मिशन की शुरुआत की गई है। पहले इसे 'राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन' (National Mission for Manuscripts) के रूप में जाना जाता था, जिसे पुनर्गठित और आधुनिक तकनीक से लैस करके एक व्यापक केंद्रीय योजना के रूप में नया रूप दिया गया है।
यह मिशन 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ा है, जिसका ध्येय भारत के प्राचीन ग्रंथों, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद, गणित और साहित्य को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करना और शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाना है।
मिशन के मुख्य उद्देश्य
व्यापक सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण: देश भर के मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, संग्रहालयों और निजी संग्रहों में बिखरी 1 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की पहचान और डिजिटल मैपिंग करना।
वैज्ञानिक संरक्षण: ताड़पत्र, छाल (भूर्जपत्र) और पुराने कागजों पर लिखी दुर्लभ पांडुलिपियों को आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से नष्ट होने से बचाना।
डिजिटलीकरण और राष्ट्रीय डिजिटल रिपोजिटरी: सभी पांडुलिपियों को उच्च गुणवत्ता में स्कैन कर एक 'नेशनल डिजिटल रिपोजिटरी' (National Digital Repository) तैयार करना, ताकि दुनिया भर के विद्वान और नागरिक इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकें।
अनुसंधान और अनुवाद: संस्कृत, प्राकृत, पाली, तमिल, फ़ारसी आदि प्राचीन भाषाओं और लिपियों में लिखी पांडुलिपियों का अनुवाद और प्रकाशन करना।
ज्ञान भारतम मिशन के 5 प्रमुख स्तंभ (Pillars)
यह मिशन आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को जोड़कर पाँच मुख्य क्षेत्रों (Verticals) पर काम करता है:
सर्वेक्षण और सूचीकरण (Survey & Cataloguing): ज्ञान भारतम मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जियो-टैग्ड (Geo-tagged) पांडुलिपि मानचित्र तैयार करना।
संरक्षण और क्षमता निर्माण (Conservation & Capacity Building): वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं की स्थापना करना और ज़मीनी स्तर पर प्रशिक्षण देकर 'पांडुलिपि मित्र' तैयार करना।
प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण (Technology & Digitization): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ओसीआर (OCR) और सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज के ज़रिए प्राचीन लिपियों को पढ़ने और सहेजने की प्रक्रिया को तेज़ बनाना।
भाषाविज्ञान और अनुवाद (Linguistics & Translation): अप्रकाशित और दुर्लभ पांडुलिपियों का आधुनिक भाषाओं में अनुवाद करना।
अनुसंधान, प्रकाशन और जन-जागरूकता (Research, Publication & Outreach): प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के ज़रिए प्राचीन भारत के ज्ञान का प्रसार करना।
नागरिक सहभागिता (Public Participation)
ज्ञान भारतम मिशन की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'जन आंदोलन' रूप है। यदि किसी व्यक्ति, परिवार या संस्थान के पास पुरानी पांडुलिपियाँ या प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ मौजूद हैं, तो वे स्वयं 'ज्ञान भारतम' पोर्टल या ऐप पर जानकारी साझा कर सकते हैं।
यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक है और इससे पांडुलिपि के स्वामित्व (Ownership) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। विशेषज्ञ टीम केवल उनका वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण करती है।
इसका महत्व और भावी प्रभाव
प्राचीन ज्ञान का पुनरुद्धार: खगोल विज्ञान, गणित, वास्तुकला, चिकित्सा और दर्शनशास्त्र जैसे विषयों में भारत के योगदान को दुनिया के सामने लाना।
आधुनिक विज्ञान से जुड़ाव: प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शोध और नवाचार (Innovation) के साथ जोड़ना।
सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा: प्राकृतिक क्षरण, दीमक और जागरूकता की कमी के कारण नष्ट हो रही अमूल्य धरोहरों को स्थायी जीवन देना।
ज्ञान भारतम मिशन भारत की समृद्ध intellectual और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर पुनः 'ज्ञान गुरु' के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।

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