भारतीय संघीय व्यवस्था एवं संघात्मक शासन
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| What is a federal system? |
यह लेख भारतीय संघीय व्यवस्था एवं संघात्मक शासन व्यवस्था के सन्दर्भ में प्रस्तुत किया गया है। इसमें हमने
- संघीय व्यवस्था
- भारत में संघीय सरकार व्यवस्था को अपनाने के कारण,
- कनाडाई मॉडल
- संघीय सरकार बनाम एकात्मक सरकार
- संविधान की एकात्मक विशेषता
- संघात्मक शासन की विशेषताएँ
- संघात्मक शासन के लाभ
- संघ शासन के दोष
जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की है। जोकि समस्त प्रकार की प्रतियोगिता परीक्षा (Competitive Examination) के दृष्टिकोण से बेहद आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है। भारतीय संघीय व्यवस्था एवं संघात्मक शासन व्यवस्था का विवरण कुछ इस प्रकार है -
भारत में संघवाद की कल्पना 1935 के भारत शासन अधिनियम में की गई थी। A - 1 के अनुसार भारत राज्यों का एक संघ होगा। भारत में संघ शासन के मुख्य समर्थक अलेक्जेंड्रोविच है। तथा KC व्हीयर के अनुसार भारत में अर्द्ध संघ है। वही ग्रेनविले ऑस्टिन ने इसे सहयोगी संघवाद कहा है। तथा डॉ भीमराव आंबेडकर ने इसे कठोर संघीय ढांचा मानने से इंकार किया है। व भारत संघ के राज्यों को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है। इस सन्दर्भ में 1963 में संविधान के 16 संशोधन द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि संघ के अलग होने के पक्ष पोषण को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण प्राप्त नहीं होगा।
संघात्मक व्यवस्था
संघीय व्यवस्था
वह शासन व्यवस्था जिसमे कई छूटे - छोटे राज्य एक समझौते के आधार पर एक संघ में सम्मिलित होते है। तथा अपने लिए एक सम्मिलित संघ सरकार के अधिपत्य को स्वीकार करते है। तथा राजनितिक विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय सरकार एवं क्षेत्रीय सरकार के मध्य संबंधों के आधार पर दो वर्गों में बांटा है। एकल व संघीय।
- परिभाषा के अनुसार एकात्मक सरकार वह है। जिसमे समस्त शक्तियां एवं कार्य केंद्र सरकार और क्षेत्रीय सरकार में निहित होती है।
वह संघीय सरकार वह है जिसमे शक्तियां संविधान द्वारा केंद्र सरकार एवं क्षेत्रीय सरकार में विभाजित होती है। तथा दोनों अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग स्वतंत्रतापूर्वक करते है। तथा संघ शासन शब्द को लेटिन भाषा के फोएडस में लिया गया है। जिसका अभिप्राय संधि या समझौता है।
भारत में संघीय सरकार व्यवस्था को अपनाने के कारण
अत: भारत में संघीय व्यवस्था को अपनाने के निम्नलिखित दो कारण थे -
- देश का वृहद आकार
- सामाजिक सांस्कृतिक विविधता
वैसे संविधान में कही भी संघ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। इसके स्थान पर संविधान के A - 1 में भारत को राज्यों के संघ के रूप में वर्णित किया गया है। तथा डॉ0 भीमराव आंबेडकर के अनुसार राज्यों के संघ से दो बाते उभरकर सामने आती है।
- अमेरिकी संघ के विपरीत भारतीय संघ राज्यों के बीच सहमति का प्रतिफल नहीं है।
- राज्यों को यह अधिकार नहीं है। कि वह स्वयं को संघ से पृथक कर सके।
कनाडाई मॉडल
भारत का संघीय व्यवस्था कनाडाई मॉडल पर आधारित है। तथा भारतीय संघीय व्यवस्था कनाडा व्यवस्था से इन आधारों पर समान प्रदर्शित होती है।
- इसका निर्माण (यानी कि विखंडित होने के तरीके)
- संघ शब्द का प्रमुखता से प्रयोग
- इसकी केन्द्रीकरण की प्रवृति (राज्यों की तुलना में केंद्र अधिक शक्तिशाली)
संघीय सरकार बनाम एकात्मक सरकार
| संघीय सरकार | एकात्मक सरकार |
| इसमें लिखित संविधान होता है। | एकात्मक सरकार में संविधान लिखित भी हो सकता है। (जैसे - फ़्रांस) व संविधान अलिखित भी हो सकता है। (जैसे - ब्रिटेन में) |
| इसमें केंद्र व राज्य के मध्य शक्तियों का विभाजन होता है। | तथा एकात्मक सरकार में कोई विभाजन नहीं होता है। समस्त शक्तियां केंद्र के पास होती है। |
| इसमें संविधान की सर्वोच्चता होती है। | एकात्मक शासन में संविधान की सर्वोच्चता हो भी सकती है। (जैसे - जापान) वह नहीं भी हो सकती है। (जैसे - ब्रिटेन में) |
| संघीय सरकार में स्वतंत्र न्यायपालिका होती है। | एकात्मक सरकार में हो भी सकती है। वह नहीं भी हो सकती है। |
| द्विसदनीय विधायिका होती है। | एकात्मक शासन में हो भी सकती है। (जैसे - ब्रिटेन में) और नहीं भी हो सकती (जैसे - चीन में) |
संविधान की एकात्मक विशेषता
उपरोक्त संघीय ढांचे के अलावा भारतीय संविधान में निम्नलिखित एकात्मक राज्य संघ की विशेषता भी है। जो निम्न है -
- सशक्त केंद्र - सातवीं अनुसूची में विषयों का विभाजन केंद्र के पक्ष में है। जो की संघीय दृष्टिकोण के विरुद्ध है।
- एक संविधान
- संविधान का लचीलापन
- आपातकालीन उपबंध
- एकल नागरिकता
संघात्मक शासन की विशेषताएँ
- कई राज्यों का एक संघ में शामिल होना
- शक्तियों का विभाजन
- दोहरी नागरिकता
- संविधान की सर्वोच्चता
- लिखित तथा कठोर संविधान
- न्यायालय की सर्वोच्चता
संघात्मक शासन के लाभ
- स्वतंत्र अस्तित्व तथा राष्ट्रीय एकता में तालमेल
- केंद्र के निरंकुशता का भय नहीं
- संविधान की सर्वोच्चता
- न्यायपालिका की सर्वोच्चता
- मौलिक अधिकारों की रक्षा
- राजनितिक चेतना
- कुशल शासन
- बड़े राज्यों के अनुकूल।
संघ शासन के दोष
- दुर्बल केंद्रीय सरकार
- केंद्र तथा इकाइयों में मतभेद
- राष्ट्रीयता की भावना में कमी
- दोहरी नागरिकता
- धन तथा समय का व्यय
- विघटन का भय
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि भारतीय संघीय व्यवस्था में केंद्र को राज्य की तुलना में अधिक शक्ति शाली बनाया गया है। जोकि संघीय व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। लेकिन औपनिवेशिक काल के अनुभव और भारत विभाजन की विभीषिका से बचने के लिए यह प्रयास विशेष परिस्थितिवश किए गए है। जो की उचित है।

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