साक्षात्कार में मानसिक सतर्कता और मानसिक दृढ़ता क्या है ?
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| साक्षात्कार में मानसिक सतर्कता और मानसिक दृढ़ता |
(A) साक्षात्कार में मानसिक सतर्कता
साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवार की मानसिक सतर्कता का भी परीक्षण किया जाता है। इस परीक्षण के तहत यह देखा जाता है कि उम्मीदवार किस प्रकार न्यूनतम संभव समय में, किसी समस्या या प्रश्न को समझकर, त्वरित समाधान या उत्तर प्रस्तुत करता है। एक कर्मचारी में मानसिक सतर्कता होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके द्वारा वह किसी व्यक्ति के विचारों अथवा समस्या को त्वरित ढंग से समझकर तदनुरूप कार्यवाही संपन्न कर सकता है। किसी संगठन के नियंत्रण में यह क्षमता अत्यधिक आवश्यक होती है।
इस क्षमता के विकास के लिए आपको अपने दैनिक जीवन में घटने वाली प्रत्येक घटना पर सूक्ष्म दृष्टि रखनी होती है और सतर्कतापूर्वक उन के महत्व को रेंखांकित करते हुए अपने विचारों को स्पष्ट करना होता है। प्रश्नों के माध्यम से जब इस क्षमता का परीक्षण किया जाए। तो उम्मीदवार को चाहिए की वह पहले प्रश्नों को समझे उन पर त्वरित ढंग से विचार करे। और सहज भाव से उनका उत्तर दे।
(B) साक्षात्कार मानसिक दृढ़ता
मानसिक सतर्कता से ही जुडी अन्य क्षमता है। मानसिक दृढ़ता। इसके माध्यम से यह परखा जाता है। कि उम्मीदवार के विचारों में कितनी दृढ़ता है और वह अपनी बात पर किस हद तक स्थिर रहता है। कहीं वह अपनी ही कही बातों से डीग तो नहीं जाता है। इस क्षमता का प्रदर्शन करते समय उम्मीदवार को साक्षात्कार के प्रारंभ से अंत तक अपने विचारों पर दृंढ रहना चाहिए। क्योकि प्राय: ऐसा होता है। की साक्षात्कार बोर्ड किसी प्रश्न को साक्षात्कार के प्रारंभ में पूछने के बाद अंत में वही प्रश्न दोहराता है, यह देखने के लिए कि -
- उम्मीदवार को प्रश्न याद है या नहीं।
- उमीदवार अपने पूर्व उत्तर पर ही क़याम रहता है अथवा इसमें कुछ परिवर्तन कर देता है। .
उदाहरण के लिए यदि आपने सरकार की किसी योजना का साक्षात्कार के प्रारंभ में समर्थन किया है। तो अंत तक उसी पर कायम रहना चाहिए। भले ही किसी सदस्य या अध्यक्ष ने उस योजना की आलोचना की हो।मात्र अध्यक्ष या सदस्य को प्रसन्न करने के लिए आपको अपने विचारों में परिवर्तन नहीं लाना चाहिए।
साक्षात्कार के दौरान ध्यान रखने योग्य कुछ बिंदु
(1) जैसा आप चाहते है। कि साक्षात्कारकर्ता का प्रश्न आपको स्पष्ट रूप से सुनाई दे। उसी प्रकार साक्षात्कारकर्ता आपसे अपेक्षा रखते है की आप अपनी बात इस प्रकार कहे की सदस्य / अध्यक्ष उसे आसानी से सुन और समझ सके। बोर्ड के सदस्यों को यह कहने का मौका कतई न दे की 'कृपया दोहराइए' या मै आपकी बात समझ नहीं सका या सकी। क्योकि साक्षात्कारकर्ता द्वारा कहे गए इन साधारण शब्दों से ही आप नर्वस हो सकते है। और आपके विचारों की तारतम्यता नष्ट हो सकती है।
(2) साधारण शब्दों का प्रयोग कीजिए। सही उच्चारण कीजिए। कठिन शब्दों से साक्षात्कारकर्ता प्रभावित नहीं होते। सरल शब्दों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करके भी आप साक्षात्कारकर्ता को प्रभावित कर सकते है।
(3) उत्तर संक्षेप में दे। अनावश्यक ढंग से उत्तर को लंबा न करे। केवल वही उत्तर दे। जो आपसे पूछा जाए। अतिरिक्त जानकारी देने का प्रयास न करे।
(4) जो कुछ बताएं उसे क्रमिक ढंग से समाप्त करे। बीच में न रुके। अपने उत्तर को एक बार में ही पूर्ण करे।
(5) जल्दबाजी न करे। जो बोलने जा रहे। उसे पहले ही दिमाग में व्यवस्तिथ कर लें।

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