आत्मविश्वास क्या है ? आत्मविश्वास का विकास कैसे करें ?
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आत्मविश्वास
आत्मविश्वास का अर्थ है, स्वयं में विश्वास रखना। 'आत्मसम्मान'' 'अपनी क्षमताओं पर विश्वास', 'दृंढ़ता' इत्यादि इसके पर्याय हो सकते है। आत्मविश्वास किसी भी व्यक्ति में यह भाव जाग्रत करता है। कि इस कार्य को मै अवश्य कर लूंगा। अत: कहा जा सकता है 'आत्मविश्वास' किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन में सफलता प्राप्त करने एवं इसमें बेहतरी लाने के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है। आत्मविश्वास व्यक्ति के चरित्र को दृंढ़ता प्रदान कर व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करता है। जो व्यक्ति आत्मविश्वास से परिपूर्ण होगा वह किसी भी कार्य को दृढ़ निश्चय के साथ पूर्ण विश्वास से सफलतापूर्वक संपन्न कर सकेगा।
और यह बात सत्य है। क्योकि व्यक्ति में आत्मविश्वास का होना अति आवश्यक है। साक्षात्कार के दौरान भी इसका अत्यधिक महत्व है। लेकिन प्रश्न यह है कि आत्मविश्वास में वृद्धि कैसे की जाए ? इस बारे में हमने नीचे और अधिक विस्तार से चर्चा की है।
आत्मविश्वास का विकास कैसे करें ?
निश्चय ही आत्मविश्वास का विकास रातों - रात या चंद दिनों में नहीं किया जा सकता। लेकिन मनोवैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे उपाए बताए है। जिनसे आत्मविश्वास वृद्धि में अत्यधिक मदद मिल सकती है।
- आत्मविश्वास का विपरीतार्थक शब्द 'डर' है। डर आपके साहस एवं आपकी तार्किक शक्ति को कम करता है। यह तनाव को बढ़ाता है। और आपको असफल हो जाने के 'फोबिया' से ग्रस्त करता है। डर को समाप्त करने के लिए 'साहस' एवं 'आत्मविश्वास' आवश्यक है। अत: अपने व्यक्तित्व के शब्दकोश से 'डर' शब्द को निकाल दे। बर्ट्रेड रसेल ने कहा है - "यह डर है, जो मनुष्य को पीछे की ओर धकेलता है। डर के कारण ही व्यक्ति स्वयं को उतने सम्मान के योग्य नहीं सिद्ध कर पाता है। जितने सम्मान का वह अधिकारी होता है।"
- आत्मविश्वास एवं इच्छा- शक्ति परस्पर अंत: संबंध रखते है। सफलता आपके कदम चूमती है आपकी इच्छा शक्ति से। गोएथे ने कहा है, "दृढ़ इच्छा शक्ति रखनेवाला व्यक्ति विश्व को अपनी ओर मोड़ लेता है। आप तब असफल होते है। जब आपकी इच्छा शक्ति में पर्याप्त मजबूती न ही होती है। अत: व्यक्तित्व में दृण इच्छा शक्ति का समावेश करे। इसे आत्मविश्वास से परिपूरित करे, तब निश्चय ही आप युद्ध में विजय प्राप्त करेंगे।
- आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। कुछ भाव इस प्रकार है -
- मुझे पूर्ण विश्वास है।
- मैं इसके प्रति पूर्ण आश्वस्त हूँ।
- मेरे ऐसा विश्वास करने के पर्याप्त कारण है।
- हाँ मुझे अपने में पूर्ण विश्वास है।
- हाँ मै खतरा मोल लेना चाहूंगा।
- आप अपना मानसिक दृष्टिकोण इस प्रकार विकसित करेंगे तो आप कार्य को बिना किसी डर और बिना किसी समस्या के पूर्ण कर सकेंगे। भाव - "मै भी इस कार्य को कर सकता हूँ" सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है। यह हमारा मानसिक दृष्टिकोण ही होता है। जिसके माध्यम से हम युद्ध के मैदान को विजित क्षेत्र में बदल सकते है। किसी कार्य की सफलता एवं असफलता में मानसिक दृष्टिकोण ही महत्वपूर्ण कारक होता है। न कि मानसिक क्षमता।
- स्पष्ट है कि आप अपनी कमियों को पहचाने और उनसे उबरने का प्रयास करे। यदि आप शर्मीले स्वभाव के व्यक्ति है। किसी प्रकार की रूढ़ियों से ग्रस्त है। तो अभ्यास के माध्यम से उन्हें दूर करने का प्रयास करे। स्वयं में साहस और आत्मविश्वास उत्पन्न करे। सामाजिक बने।

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