Welcome to SRZ Results | Trusted Source for Jobs, Education & Updates
SRZ Results SRZ Results.Com
Jobs • Schemes • GK • Indian Polity • Agriculture

Sakshatkar Ka Arth Evam Uddeshya In Hindi

0

 साक्षात्कार का अर्थ एवं उद्देश्य सरल शब्दों में

Sakshatkar Ka Arth Evam Uddeshya In Hindi सरल शब्दों में
साक्षात्कार (INTERVIEW)

साक्षात्कार 

ऑक्सफोर्ड शब्दकोश के अनुसार - किसी अभ्यर्थी के गुणों के आकलन या किसी व्यक्ति के विचारों से अवगत होने के उद्देश्य से आयोजित ' सम्मुख बैठक ' (FACR TO FACE MEETING) को साक्षात्कार (INTERVIEW) कहा जाता है। साक्षात्कार का अंग्रेजी रूपांतरण INTERVIEW है। जो फ्रेंच शब्द ENTERVOIR से बना है। इसका अर्थ होता है। CLIMPSE अर्थात क्षणिक चमक या झलक। 

उपर्युक्त कथनों से स्पष्ट है की साक्षात्कार मुख्यत: निम्न दो उद्देश्यों से आयोजित व्यक्तियों की सम्मुख बैठक (Face To Face Meeting) है।
  1. व्यक्तियों के विचार एवं कथन जानने के उद्देश्य से साक्षात्कार : ऐसे साक्षात्कार प्राय; फिल्म स्टार या प्रधानमंत्री या प्रख्यात व्यक्तियों के विचारों को जानने के उद्देश्य से आयोजित किए जाते है। 
  2. चयन हेतु अभ्यर्थी के गुणों के आकलन के लिए साक्षात्कार : इस प्रकार के साक्षात्कार नौकरियों या नियुक्तियों एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इक्छुक अभयर्थियों के चयन हेतु आयोजित किए जाते है। विवाह हेतु उपयुक्त जीवन साथी के चयन के लिए आयोजित साक्षात्कार को भी इसी श्रेणी में रखा जा सकता है।

साक्षात्कार परीक्षण क्या है ?

कुछ अभ्यर्थी साक्षात्कार को प्रश्न उत्तर की एक शैली समझते है। उनके मन में अक्सर यह धारणा रहती है। की साक्षात्कार में उनसे कुछ प्रश्न पूछे जाएँगे। यदि वह प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाया या गलत उत्तर दिए, तब वह असफल हो जाएगा। इसी अवधारणा के वशीभूत होकर अकसर असफल अभ्यर्थी यह शिकायत करते हुए सुने गए है। की "मुझसे तो 20 प्रश्न पूछे गए थे। और उनमे से मैने 18 प्रश्नों के सही - सही जवाब दे दिए थे। फिर भी मुझे बहुत कम नंबर मिले।" 

बल्कि सच तो यह है की साक्षात्कार एक ऐसी पद्धति होती है। जिसमे आपके उत्तरों से आपके ज्ञान एवं व्यक्तित्व की जाँच नहीं की जाती, बल्कि आपके उत्तरों की मौलिकता और अभिव्यक्ति की शैली से आपके व्यक्तित्व की जाँच की जाती है।

साक्षात्कार के दौरान व्यक्ति के बाह्रा स्वरूप या केवल विषय के ज्ञान का परिक्षण नहीं किया जाता। यदि ऐसा होता तो सरकारी नौकरी में केवल स्मार्ट लोग ही होते। आपने देखा होगा की अनेक सामान्य से दिखने वाले व्यक्ति भी अच्छे - अच्छे पदों पर आसीन हो जाते है। इसका मुख्य कारण यही होता है। की साक्षात्कार परीक्षण में उनके आंतरिक व्यक्तित्व की जाँच की गई थी। वस्तुत: साक्षात्कार का उद्देश्य आपके ज्ञान का मूल्यांकन करना है। ही नहीं। उसका मूल्यांकन तो आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में पहले ही कर लिया है। साक्षात्कार का मूल उद्देश्य होता है। आपके सम्पूर्ण व्यक्तित्व की परख करना। साक्षात्कार जाँच करता है आपकी /आपके 
  • आत्मविश्वास की 
  • मानसिक जागरूकता की
  • तार्किक क्षमता की 
  • जीवन के प्रति दृष्टिकोण की 
  • मस्तिष्क के संतुलन की 
  • मानवीय गुणों की 
  • नेतृत्व क्षमता की 
  • आपकी विश्वसनीयता की 
आपसे जो भी प्रश्न पूछे जाते है। वे सब आपके इन्ही गुणों की जाँच करने के लिए माध्यम का काम करते है। जिस अभ्यर्थी में ये गुण जितने अधिक परिलक्षित होते है। वह अभ्यर्थी उतना ही अधिक उपयुक्त समझा जाता है। अत: आपको चाहिए की आप अपने अंदर इन गुणों को अधिक से अधिक समाहित और विकसित करने के प्रयास करे। 

अब प्रश्न यह पैदा होता है। की आखिर कोई इन गुणों को विकसित कैसे करे  ?

इसलिए कहा जाता है की साक्षात्कार की तैयारी मुख्य परीक्षा की तरह 4 - 6 महीने तक किसी कमरे में बंद होकर नहीं की जा सकती। इसके लिए तो निरंतर प्रयास की जरुरत होती है। किसी भी अभ्यर्थी का व्यक्तित्व पूरी तरह उसके अपने हाथ में नहीं होता। जीवन के न जाने कितने तत्व हमारे व्यक्तित्व को हर क्षण प्रभावित करते रहते है। इनमे शामिल कुछ प्रमुख तत्व इस प्रकार है -
  • हमारी पारिवारिक पृष्ठभूमि 
  • हमारे रहने का वातावरण (जैसे - गांव, क़स्बा, नगर, महानगर आदि)
  • स्वयं की शैक्षणिक पृष्ठभूमि
  • जीवन में घटने वाली घटनाएँ 
  • जीवन के प्रति हमारा चिंतन 
अत: इन तत्वों की तैयारी नहीं की जा सकती। इनमे से कुछ तो आपको परिस्थितियों की देंन होते है। लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं की आप इन परिस्थितियों के पूर्णत: दास होते है। जीवन में आपको अनेक ऐसे लोग मिलेंगे। जिन्होंने अपने आत्मविश्वास तथा जिजीविषा के द्वारा अपनी सीमाओं का अतिक्रमण करके जीवन की उच्चतम सफलताओं को प्राप्त किया है। मैं यहाँ आपको यह विश्वास दिलाना चाहूँगा की गरीब से गरीब आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर तथा गावों में रहने वाली पारिवारिक पृष्ठभूमि की लड़की भी अपने व्यक्तित्व में बड़ी सरलता के साथ सकारात्मक रूपांतरण ला सकती है। बशर्ते की वह इसके प्रति थोड़ी जागरूक हो। 

यहाँ जागरूकता का संबंध आत्मविवेचन से है। आत्मावलोकन से है। आत्मालोचना से है और आत्मनिरीक्षण से है। जो अभ्यर्थी निरंतर अपनी कमियों पर ध्यान देता है। और उन्हें दूर करने के प्रयास करता रहता है। वह भविष्य में सबल व्यक्तित्व के रूप में सामने आता है। इसके लिए सबसे बड़ा हथियार होता है - ज्ञान की प्रखर चेतना। अध्ययन, निरीक्षण, तर्क - वितर्क और अनुभवों के रास्ते से गुजरते हुए आप अपने व्यक्तित्व को एक नया व्यापक आयाम दे सकते है। यह काम थोड़ा भी कठिन नहीं है। बहुत सरल है। लेकिन इसके लिए आपको निरंतर अपने आप से ही जूझना होगा। इतना ही पर्याप्त है की आप अपनी आंखे हमेशा खुली रखे। अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करे। 

व्यक्तित्व विकास के दो पक्ष सकारात्मक गुण और नकारात्मक गुण

व्यक्तित्व विकास के दो पक्ष होते है। पहला है -व्यक्तित्व में सकारात्मक गुणों का संचार करना, जिसका विवरण ऊपर दिया जा चूका है। और दूसरा पक्ष है - अपने व्यक्तित्व से नकारात्मक गुणों को निष्कासित करना। इसलिए आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता होती है। आत्मनिरीक्षण  के द्वारा आप इन तत्वों की पहचान करते है। और धीरे - धीरे उनसे बचने एवं उन्हें अपने अंदर से निकाल फेंकने के प्रयास करते है। 

इस तरह के कुछ नकारात्मक तत्व है -

  • अतिरिक्त भावुकता
  • अतिरिक्त चालाकी
  • छल एवं कपट की भावना
  • कृमित्रतापूर्ण (बनावटी) व्यवहार 
  • अनिर्णय की स्तिथि
  • अनावश्यक संकोच, यहाँ तक की सामान्य शिष्टाचार निभाने तक में भी संकोच 
  • उच्च भावना की ग्रन्थि 
  • हीन ग्रन्थि 
  • सबसे बात न कर पाने की कमी 
  • भाषा संबंधी अशुद्धियाँ 
  • अप्रभावशाली भाषा 
  • जल्दबाजी करना 
  • जीवन के प्रति निराशावादी दृष्टिकोण 
  • किसी भी विषय के प्रति उग्रवादी विचार 
  • दूसरे के दृष्टिकोण को निरस्त करने की भावना
  • असहयोग की इक्षा 
  • अतिरिक्त एकांतप्रियता आदि।
व्यक्तित्व के ऐसे और भी दुर्गुण हो सकते है। जो आपको निरंतर कमजोर बनाते है। यहाँ उनमे से केवल कुछ प्रमुख दुर्गुणों की ही सूची दी गई है। आप देखिए की इनमे कौन - कौन से तत्व ऐसे है, जो आपके व्यक्तित्व को ग्रहण की तरह घेरे है। उन्हें पहचानिए और उनके विरुद्ध सतर्क रहिए। सतर्क रहते हुए निरंतर उनके विरुद्ध संघर्ष कीजिए और इस प्रकार इन काली छायाओं से मुक्ति पाइए। कुछ समय के बाद आप देखेंगे की किस प्रकार आपके व्यक्तित्व का कायाकल्प हो गया है। आपके अंदर एक जबरदस्त आत्मशक्ति आ गई है। किस प्रकार आपका व्यक्तित्व दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता रखने लगा है। यही वह तत्व है। जो इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों को प्रभावित करके आपको अच्छे अंक दिला सकता है।

Post a Comment

0Comments

Do not post spam links in the comment box.

Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Accept !