भारतीय सुनामी समुद्री भूचाल 2004, सुनामी के परिणाम एवं सुनामी से बचाव के उपाय या सुझाव
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| भारतीय सुनामी समुद्री भूचाल 2004 |
26 दिसंबर 2004 को आये भूचाल जनित सुनामी ने कई देशों के साथ - साथ भारत के पूर्वीतट पर बहुत अधिक तबाई मचाई थी तथा इस भूचाल का अभिकेंद्र सिमिज लेइ द्वीप में भूकंप व ज्वालामुखी की चापाकार में इंडोनेशिया देश के उत्तरी - पश्चिमी प्रान्त सुमात्रा में था। तथा इस भूचाल ने 40 साल के इतिहास में सबसे शक्तिशाली सुनामी उत्पन्न की। जिसके कारण मानव इतिहास में सबसे अधिक 3 लाख लोगो की मृत्यु हुई।
सुनामी की विनाश लीला
3,00,000 से अधिक व्यक्तियों की अकाल मृत्यु व लाखों डॉलर के बराबर संपत्ति का नुकसान, हजारों व्यक्ति घायल व 20 लाख से अधिक लोगों की पुनर्वास की समस्या उत्पन्न हुई। इस सुनामी ने दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में भारी तबाही मचा दी। तथा इस सुनामी में जो देश प्रभावित हुए है। उनमे -
- भारत
- श्रीलंका
- बांग्लादेश
- थाईलैंड
- बर्मा
- इंडोनेशिया
- मलेशिया (सबसे अधिक 2,00,000 की मृत्यु)
तथा इस सुनामी का कहर मालद्वीप, मेडागास्कर व अफ्रीका महाद्वीप का पूर्वी तट पर भी हुआ।
सबसे अधिक तबाही बाँदा अरब (सुमात्रा - इंडोनेशिया) में हुई। या फिर थाईलैंड (फुकेट में) तथा भारत में विनाश का अधिकतर असर तमिलनाडु के कडलिट स्थान से विजयनगर आँध्रप्रदेश के स्थान तक देखा गया। तथा भारत के सुदूर दक्षिण में विवेकानंद मेमोरियल (केरल) तक व केरल के अन्य अंदरूनी क्षेत्रों में भी क्षति हुई व वायुसेना का अण्डमान स्टेशन निकोबार द्वीप समूह तबाह हो गए।
सुनामी के दूरगामी परिणाम
इससे उत्पन्न सुनामी के कारण प्रभावित स्थलों की भू -आकृति ही बदल गई है व जैव सम्पदा पर भी काफी असर पड़ा है। तथा अंडमान निकोबार द्वीप समूह में कुछ द्वीपों के निचले क्षेत्र तो जलमग्न हो गए। और कुछ द्वीपों में तो 1 से 1 / 2 मीटर तक पानी भर गया। कही पर समुद्र तटों के काफी नजदीक आ गया। तथा बंगाल की खाड़ी में स्तिथ इंदिरा प्वाइंट का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। अमेरिका में नासा संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की भू - आकृति में अवश्य बदलाव आये है। जैसे - पृथ्वी कुछ सेंटीमीटर (2 . 5) उत्तर की ओर खिसक गई। तथा उसके भू - भाग मध्य क्षेत्र में उथल होना पाया गया है। इसके साथ ही दिन की अवधि 2 . 66 माइक्रो सेकेण्ड घट गई है।
सुनामी से बचाव के उपाए या सुझाव
हमारी सरकार सुनामी जैसे आपदा का सामना करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। अपितु अमेरिका व अन्य संस्थाओं ने एक विनाशकारी " भूचाल की घोषणा, सुमात्रा " में सुबह 6 : 30 बजे ही कर दी थी। अगर हम ध्यान देते तो जान - माल का कुछ विनाश कम किया जा सकता था। अब हमारे यह सुझाव है -
- भारत को विश्व के सुनामी से बचाव व सूचना देने वाली संस्थाओं के साथ हाथ मिलाना चाहिए जिससे आपातकाल में लोगों की सुरक्षा की जा सके।
- हमें समुद्र तल में सेंसर लगाने चाहिए जिससे हमें भूचाल व सुनामी तरंगों का पता चल सके।
- सागर तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव के पेड़ अत्यधिक मात्रा में लगाने चाहिए। जिससे जमीन का कटाव रुकेगा।
- सुनामी की घोषणा की दशा में लोगों को ऊँचे स्थानों की और जाना चाहिए। जैसा की अंडमान निकोबार की जनजातियों ने किया था।
- पक्की ऊँची इमारतों से सबसे ऊँची छत पर रहना चाहिए। जब तक सुनामी की ख़त्म होने की घोषणा नहीं की जाती है। तब तक निचले स्थानों पर नहीं आना चाहिए।
- सुनामी आने से पहले समुद्र का पानी अचानक किनारे से हटता है। ऐसी स्तिथि में समुद्र में व समुद्र से लगे नदी, तालाबों में न जाए।
- संदुरा के अंदर के टीले, टापुओं पर, न शरण ले वह कभी भी टूट सकते है व डूब सकते है।

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