Jal Grahan Prabandhan Yojana, Niranchal Yojana, Neeranchal Watershed

Rajkumar Yadav
0

 जलग्रहण प्रबंधन योजना, निरांचल योजना एवं नीरांचल राष्ट्रीय वाटरशेड परियोजना और कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

Jal Grahan Prabandhan Yojana, Niranchal Yojana, Neeranchal Watershed

जल ही जीवन है। उपरोक्त पंक्ति से स्पष्ट है की पृथ्वी जगत में सजीवों को जीवन यापन करने के लिए सर्व प्रमुख जल पर निर्भरता अधिक होती है।चाहे वह पेयजल स्वच्छ सिंचाई आदि कार्यों को सम्पादित करने के लिए आवश्यक होता है। अत: हमें अपने भावी जीवन को किसी भी प्रकार के जल संकट से बचाना है तो विभिन्न माध्यमों से जल का प्रबंध करना चाहिए जिसमे सामान्यत: वर्षा के पानी के संबंध में उचित प्रबंध करना चाहिए। इसके लिए भारत सरकार ने विभिन्न समयों में जल संवर्धन एवं उपयोगिता के लिए भिन्न भिन्न कल्याण कारी योजना संचालित किए है। जैसे-
  1. समेकित बंजरभूमि विकास कार्यक्रम (IWDP)
  2. मरू विकास कार्यक्रम (DDP)
  3. सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP)
  4. एकीकृत जल ग्रहण प्रबंधन परियोजना (IWPM)
हनुमंत राव समिति की सिफारिशों के आधार पर इन क्षेत्र विकास कार्यक्रमों को 1 अप्रैल 1995 से जलग्रहण विकास सम्बन्धी समान मार्गदर्शी सिद्धांत के अनुसार कार्यान्वित किया गया है।

भूमि संसाधन विभाग ने एक नई पहल "हरियाली 2003" से शुरू की जिसका उद्देश्य जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका को बढ़ाना था। इस पहल में एकीकृत बंजर भूमि विकास कार्यक्रम (IWDP), सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP) और मरुस्थल विकास कार्यक्रम (DDP) आदि को "पंचायती राज संथाओं (PRI) द्वारा क्रियान्वित करने का प्रावधान किया गया। 1 अप्रैल 2008 को भारत सरकार ने सभी जलग्रहण विकास कार्यों के क्रियान्वयन के लिए नए निर्देश जारी किए। इस समान मार्गदर्शी सिद्धांत वर्ष 2008 (यथा संशोधित) 2011 के आधार पर वर्ष 2009 - 10 में समेकित जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम (IWMP) प्रारंभ की गई।

एकीकृत जल ग्रहण प्रबंधन परियोजना (IWMP) के उद्देश्य

  1. प्राकृतिक संसाधनों - भूमि, जल एवं कृषि संपदा का संरक्षण एवं विकास।
  2. भूमि की जल को रोकने की क्षमता और उत्पादकता में सुधार।
  3. वर्षा जल संचयन एवं पुनर्भरण। 
  4. भूमि का इष्टतम सद्पयोग। 
  5. हरियाली - वृक्ष, फसलें एवं घास आदि उगाना।
  6. ग्रामीण मानव शक्ति और ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली का विकास।
  7. समुदाय की सामाजिक आर्थिक स्तिथि में सुधार।
  8. वर्तमान में वाटर शेड प्रबंधन को उच्च प्राथमिकता दी जाती है।

शामिल कार्यक्रम

1. समेकित बंजरभूमि विकास कार्यक्रम (IWDP - INTERGRATED WASTELAND DEVELOPMENT PROJECT): IWDP केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम है। जो वर्ष 1989 - 90 से कार्यान्वित किया गया तथा इस कार्यक्रम के अंतर्गत बंजरभूमि और अवक्रमित भूमि के विकास से सभी स्तरों पर लोगों की भागीदारी को बढ़ाए जाने के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों के सृजन में वृद्धि होने की आशा की जाती है।

2. मरू विकास कार्यक्रम (DDP - DESERT DEVELOPMENT PROGRAMM): मरू भूमि विकास कार्यक्रम DDP को राजस्थान में वर्ष 1977 - 78 में शुरू किया गया था। तथा इसका मुख्य उद्देश्य - ग्रामीण समुदाय के आर्थिक विकास को बढ़ावा और ग्रामीण क्षेत्रों में समाज के संसाधनहीन गरीब लोगो और संसार के उपेक्षित वर्गों की आर्थिक स्तिथि में सुधार लाना है।

3. सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP - DROUGHT PRONE ARES PROGRAMME): DPAP कार्यक्रम केंद्र सरकार ने उन क्षेत्रों जहाँ पर लगातार भयंकर सूखे की स्तिथि बनी रहती है। की विशेष समस्याओं को हल करने के लिए वर्ष 1973 - 74 में शुरू किया था। तथा कार्यक्रम का मूल उद्देश्य फसलों के उत्पादन पशुधन तथा भूमि की उत्पादकता जल और मानव संसाधनों पर पड़ने वाले सूखे के प्रतिकूल प्रभावों को कम करना है। व प्रभावित क्षेत्रों को सूखे के प्रभाव से मुक्त कराना है।

4. एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन परियोजना (IWPM): IWPM भारत सरकार के फ्लेगशिप कार्यक्रमों में से एक है। जो 29 राज्यों में संचालित है। तथा एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम, चीन के बाद विश्व का द्वितीय सबसे बड़ा वाटरशेड कार्यक्रम है। तथा 12 वीं पंचवर्षीय योजना में इस कार्यक्रम के अंतर्गत 29000 करोड़ रुपए खर्च किए गए। वर्ष 2015 - 16 से एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन परियोजनाएं (IWPM) को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना - जलग्रहण क्षेत्र विकास के नाम से संचालित किया है। तथा IWPM की एक परियोजना मिली - 500 का उपचार योग्य क्षेत्रफल लगभग 5000 हेक्टयर के आसपास होता है। व भारत सरकार, भूमि संसाधन विभाग द्वारा सामान्य जिलों में रुपए 12000 प्रति हेक्टेयर और IAP जिलों में रु 5000 प्रति हेक्टेयर की दर से परियोजना की लागत निर्धारित की गई है। तथा प्राप्त होने वाले आबंटन का 60 % केंद्र सरकार एवं 40 % राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। व परियोजनाओं की पूर्णता अवधि 4 से 7 वर्ष तक होती है। व इन गतिविधियों का क्रियान्वयन निम्नानुसार 3 चरणों में पूरा करना होता है। 
  1. प्रारंभिक चरण - 1 से 2 वर्ष
  2. वाटरशेड कार्य चरण - 2 से 3 वर्ष
  3. समेकन और निर्वतन चरण - 1 से 2 वर्ष
IWPM के अंतर्गत वर्ष 2009 - 10 से 2014 - 15 तक कुल 263 परियोजनाओं की स्वीकृति प्राप्त की गई। तथा इन परियोजनाओं की लगत रु 1498. 04 करोड़ एवं उपचार क्षेत्रफल 11. 97 लाख हेक्टेयर है।

नीरांचल "राष्ट्रीय वाटरशेड परियोजना"

बढ़ती जनसख्या व घटते जल संसाधनों को देखते हुए जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। इसके दृष्टिगत केंद्र सरकार ने जल के उचित उपयोग एवं संरक्षण के लिए 8 फरवरी 2016 से राष्ट्रीय वाटरशेड प्रबंधन परियोजना "नीरांचल" का शुभारंभ किया। अत: अक्टुम्बर 2015 में मंत्रिमंडलीय समिति ने विश्व बैंक से सहायता प्राप्त "नीरांचल" परियोजना को अनुमोदित भी किया। तथा 2016 में "भारत सरकार" और "विश्व बैंक" ने राष्ट्रीय वाटरशेड प्रबंधन परियोजना नीरांचल के लिए एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। 8 फ़रवरी 2016 से राष्ट्रीय वाटरशेड प्रबंधन परियोजना नीरांचल का शुभारंभ किया है। व परियोजना की अवधि 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2021 तक कुल छ: बर्षों की होगी। परियोजना की संपूर्ण लागत 2142 . 30 करोड़ रुपए है। जिसमे भारत सरकार 1071 . 15 करोड़ रुपए (50 %)वहन करेगी। जबकि शेष विश्व बैंक से ऋण द्वारा पूर्ति की जाएगी। तथा नीरांचल राष्ट्रीय वाटरशेड परियोजना के माध्यम से वर्षा आधारित ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन किया जाएगा। तथा इस परियोजना से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को भी सहायता मिलेगी। अर्थात नीरांचल परियोजना में छतीसगढ़ का कांकेर एवं जशपुर जिला शामिल है।

महत्वपूर्ण

समेकित जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम का प्रांरभ 2009 - 10 में किया गया सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम केंद्र सरकार ने 1973 से 74 में शुरू किया तथा सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम का उद्देश्य फसलों के उत्पादन पशु धन तथा भूमि की उत्पादकता जल एवं मानव संसाधन पर पड़ने वाले सूखे के प्रतिकूल प्रभाव को कम करना है।

मरू विकास कार्यक्रम राजस्थान में 1971 से 78 में शुरू किया गया। तथा IWDP विकास कार्यक्रम 1989 - 90 से शुरू किया गया। तथा एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन का विश्व में भारत का स्थान दूसरा व पहला चीन का है। व एकीकृत वाटरशेड जल प्रबंधन योजना वर्तमान में "प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना" जल ग्रहण क्षेत्र विकास के नाम से संचालित है। 2015 - 16 से तथा तथा जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन के लिए लागत सामान्य जिलों में 12 हजार प्रति हेक्टेयर और आई. ए. पी जिलों में 5 हजार प्रति हेक्टेयर (भारत सरकार भूमि संसाधन विभाग द्वारा) निर्धारित की गई है। तथा जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन के लिए जलग्रहण प्रबंधन परियोजना में केंद्र राज्य की भागीदारी 60 : 40 है। 

मंत्रिमंडल समिति ने विश्व बैंक (अक्टुम्बर 2015 में) की सहायता से प्राप्त नीरांचल परियोजना को अनुमोदित किया। तथा भूमि संसाधन विभाग ग्रामीण विकास मंत्रालय नई दिल्ली वर्ष 2015 में देश का BEST PRACTICE वर्ग पुरुस्कार छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के मानपुर विकास खंड में संचालित IWMP परियोजना में दिया गया।

Post a Comment

0Comments

Do not post spam links in the comment box.

Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Accept !