Bharat Me Khadya Prasanskaran Aur Labh In HIndi

Rajkumar Yadav
0

 भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग जानिए आखिर यह चर्चा में क्यों आया

भारत द्वारा खाद्य प्रसंस्करण के लिए वर्ल्ड फ़ूड इंडिया समारोह का आयोजन किया गया तथा भारत में किसी उत्पाद के क्षेत्र में भारत का दूसरा स्थान है यानी की दूसरा बड़ा उत्पादक देश है। विश्व में पर चैसिंग (परचेसिग) पवार पेरिटी मतलब PPP के मामले में भारत की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

Bharat Me Khadya Prasanskaran Aur Labh In HIndi

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विभिन्न चरण

कृषि उत्पादों फलों, मांस एवं दूध जैसे खाद्य एवं पेय पदार्थों को प्रसंस्कृत कर उपभोग के लायक बनाना यानी खाने लायक बनाना है। तथा खाद्य प्रसंस्करण के निम्नलिखित दो चरण होते है।
  • प्राथमिक
  • द्वितीयक
अर्थात प्राथमिक चरण में कच्ची सामग्रियों में आवश्यक पोषक तत्व मिलाना और हानिकारक जीवाणुओं को ख़त्म करना है।
वही इसके दूसरे चरण में उत्पादों की पेकिंग करना है। तथा लास्ट और अंतिम यानी तीसरे चरण में उत्पादों को उपभोक्ता तक पहुचाना है।

खाद्य प्रसंस्करण के लाभ

इससे विवधता को बढ़ावा मिला। तथा दूसरा महत्वपूर्ण लाभ यह है की इससे खद्यानों का मूल्य वर्धन होने से किसानों की आय में बढ़ावा भी होगा। इसके अलावा नवीनतम आर्थिक गतिविधियों का विस्तार भी होगा। और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृंढीकरण करने में मदद मिलेगी।

खाद्य प्रसंस्करण के लिए चुनौतियां

इसमें पर्याप्त आधारभूत संरचना का आभाव है। और कुशल मानव संसाधन का आभाव है। जो सिमित मात्रा में उपलब्ध है। तथा इसके अलावा सरकारी नीतियों में कमी है। और पैकेजिंग की लागत देश में ज्यादा है। यदि देखा जाए तो खाद्य प्रसंस्करण की चुनौतियों में जानकारी का आभाव भी एक महत्वपूर्ण घटक है।

महत्वपूर्ण सुझाव

यह है की विकसित आधारभूत संरचना का निर्माण होना चाहिए। साथ ही कुशल मानव संसाधन तैयार करने की भी जरुरत है। तथा खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में रिसर्च एंड डेवलपमेंट का कार्य होना चाहिए। यानी शोध एवं विकास होना चाहिए। साथ ही जटिलताओं को कम करना चाहिए। यानी की उनकों कम करने की जरुरत है। तथा सरकारी नीतियों में निर्धनता की आवश्यकता है। जो की अभी निरंतर नहीं है। इसके अलावा वर्तमान में प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना इस क्षेत्र में सहायक है जिससे खाद्य प्रसंस्करण में काफी मदद मिलेगी।

भारत वर्ल्ड फ़ूड इंडिया 2017

भारतीय और व्यवसाइयों एवं निवेशकों के बीच भागीदारी की सुविधा के लिए यह एक वैश्विक आयोजन था। तथा आयोजन में 30 से ज्यादा देशों ने भाग लिया जिनमे जर्मनी, डेनमार्क और जापान, इटली तथा नीदरलैंड उपस्तिथ थे। इसका उद्देश्य खाद्य अर्थव्यवस्था को रूपांतरित करना है। और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए भारत को FOOD PROCESSING HUB बनाने का भी उद्देश्य है। तथा खाद्य सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक प्रोत्साहित कदम माना जा रहा है। अथवा इस को एक प्रोत्साहित कर्म माना जा रहा है।

खाद्य प्रसंस्करण

कृषि - कृषकों के हित में है, मजबूत खाद्य प्रसंस्करण

चंद्रजीत बनर्जी के अनुसार - "मजबूत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और नुकसान को कम करने में तो सहायक होगा ही साथ ही वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने में भी मददगार होगा"।
भारत में कई प्रकार के कृषि जलवायु क्षेत्र विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ और भूभाग है। जिनमे अनेक प्रकार की कृषि उपज होती है। इनमे अनेक प्रकार के अनाज, फल, और सब्जियां तथा नाना प्रकार के पोषक सभी शामिल है। तथा इन संसाधनों के साथ भारत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए एक स्वाभाविक केंद्र है। बहरहाल, देश में 10 फीसदी से भी कम कृषि उपज का प्रसंस्करण किया जाता है।जबकि 30 फीसदी तक फसल ख़राब हो जाती है। अगर खाद्य प्रसंस्करण को व्यवस्तिथ ढंग से आजमाया जाए तो कृषि की उत्पादकता बड़ाई जा सकती है। व नुकसान से बचा जा सकता है। तथा कृषि क्षेत्र में यह किसानों की आय बढ़ाने में मदद करता है। अत: इसकी बदौलत फसल उत्पादन में वृद्धि और उसका मूल्य वर्धन किया जा सकता है। 

इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र सर्वाधिक रोजगारपरक इलाकों में से एक है। अत: यह क्षेत्र कई अन्य पूंजी आधारित क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा रोजगार प्रदान करता है। खासतौर पर महिलाओं के लिए यहाँ काफी रोजगार है। अर्थात यह क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था की एक सामाजिक आवश्यकता को भी पूरा करता है। व किसानों की आय के साथ -साथ यह महिला सशक्तिकरण का भी माध्यम है। फ़िलहाल खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र देश के कुल खाद्य बाजार में 32 फीसदी का हिस्सेदार है। और उत्पादन, खपत, निर्यात और संभावित वृद्धि के मामले में यह पांचवे स्थान पर है। व देश के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है। वर्ष 2013 में जहाँ यह क्षेत्र 40 अरब डॉलर का था। वही सन 2020 तक इसके बढ़कर 100 अरब डॉलर होने की उम्मीद है।

भारत में खाद्य प्रसंस्करण पांच क्षेत्रों से मिलकर बना है - डेयरी फल, एवं सब्जी प्रसंस्करण, अनाज का प्रसंस्करण, मांस एवं पोल्ट्री प्रसंस्करण तथा पेय पदार्थ आदि।
वर्ष 2015 - 16 में 15 . 55 करोड़ टन दूध के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राष्ट्र रहा। तथा भैंस के मांस, पालतू पशुओं और मोटे अनाज का भी यह सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके अतिरिक्त अनाज, फलों और सब्जियों के उत्पादन के मामले में इसका स्थान दूसरा है। अर्थात कुल खाद्यान उत्पादन में भी यह विश्व में दूसरे स्थान पर है।

सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास के लिए विशेष प्रयास किए है। "मेक इन इंडिया अभियान" के अधीन इसे महिलाओं के लिए रोजगार सृजन की खातिर खासतौर पर रेखांकित किया गया है। तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े मंत्रालय ने देश भर में कई मेगापार्क स्थापित किए है। इनका उद्देश्य हर क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली उन्नत खाद्य उपज को सामने लाना है। और फ़ूड पार्क को विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाओं, शोध सुविधाओं, परिक्षण प्रयोगशालों, विकास केंद्रों और परिवहन लिंकेज के साथ मजबूत बनाना होगा। व मंत्रालय ने 41 मेगा फ़ूड पार्क मंजूर किए है। और नो फ़ूड पार्क पहले से परिचालित हो रहे है। तथा 100 से अधिक शीत गृह श्रंखलाएं परिचालित है। जबकि 236 अन्य की मंजूरी दी जा चुकी है।

उपयोगी

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों, श्रमिकों और महिलाओं के जीवन में बदलाव का एक अहम् क्षेत्र है। तथा "वर्ल्ड फ़ूड इंडिया 2017 ने पहली बार भारतीय खाद्य क्षेत्र के लिए दुनियां के दरवाजे खोले है। उसे अपने समृद्धि खानपान की विरासत सामने रखने का अवसर मिला है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का मतलब खाने की वस्तुओं की प्रोसेसिंग कर उसे नए रूप में पेश करने के कारोबार से है। भारत में लोगों की तेजी से बदलती लाइफ स्टाइल ने खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों की मांग में लगातार बढ़ोतरी की है। ऐसे में कारोबारी इस क्षेत्र में कम निवेश और बेहतर कारोबारी सहायता के जरिए एक नया मुकाम बना सकते है। जिसके लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय कई सारी योजनाएं चला रहा है। इसके तहत नई इकाई लगाने, मौजूदा इकाई का आधुनिकीकरण करने, तकनिकी सहयता आदि के लिए सहायता कर रही है। तथा भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग क्षेत्र में प्रसंस्कृत खाद्य के उत्पादन और निर्यात की पर्याप्त संभावनाएं है। खाद्य बाजार लगभग 10 . 1 लाख करोड़ रुपए का है। जिसमे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का हिस्सा 53 % अर्थात 5 . 3 लाख करोड़ रुपए का है।

Post a Comment

0Comments

Do not post spam links in the comment box.

Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Accept !