भू - जल एवं जल संग्रहण के उपाए एवं जल को संरक्षित करने की आवश्यकता
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| भू - जल एवं जल संग्रहण |
जल क्या है ? WHAT IS WATER
जल ही जीवन है। आप भोजन के बिना एक माह से अधिक जीवित रह सकते हो। परन्तु जल के बिना आप एक सप्ताह से अधिक जीवित नहीं रह सकते। कुछ जीवों (जैसे जैली फिश) में उनका 90 % से अधिक शरीर का भार जल से होता है। तथा मानव शरीर में लगभग 70 % जल होता है। मस्तिष्त में 85 % जल है। रक्त में 79 % जल है। तथा फेफड़ों में लगभग 80 % जल होता है।
जल संरक्षण
वर्षों से बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण में वृद्धि तथा कृषि में विस्तार होने से जल की मांग बढ़ती जा रही है। अतएव जल संरक्षण आज की आवश्यकता बन गई। वर्षा जल संचयन मूलयत: भवनों की छतों पर इक्कठा करके भूमि में संरक्षण करके आगे काम में लेने की प्रक्रिया है। इसके लिए यह अत्यावश्यक है की भू - जल की गिरावट तथा भू - जल स्तर में सुधार किया जाए। तथा समुद्र के जल का अंतर्गमन अर्थात समुद्री जल को भूमि की तरफ आने से रोका जाए और वर्षा मौसम के दौरान सतही जल का अपवाह तथा शहरी अपशिष्ट जल का संरक्षण किया जाए। नीचे कुछ सटीक उपाए दिए गए है। जोकि इस प्रकार है।
- यह जाँच करे की आपके घर में पानी का रिसाव न हो।
- आपको जितनी आवश्यकता हो उतने ही जल का उपयोग करे।
- पानी के नलों को इस्तमाल करने के बाद बंद रखे।
- मंजन करते समय नल को बंद रखे तथा आवश्यकता होने पर ही खोले।
- नहाने के लिए अधिक जल को व्यर्थ न करे।
- ऐसी वाशिंग मशीन का उपयोग करे जिससे अधिक जल की खपत न हो।
- खाद्य सामग्री तथा कपड़ों को धोते समय नलों का खुला न छोड़े।
- जल को कभी भी नाली में न बहाए बल्कि इसे अन्य उपयोगों जैसे - पौधों अथवा बगीचे को सींचने अथवा सफाई कार्यों इत्यादि में लाए।
- पानी की बोतल में अंतत: बचे हुए जल को फेके नहीं अपितु इसका पौधों को सींचने में उपयोग करे।
- तालाबों, नदियों अथवा सुमद्र में कूड़ा न फेके।
जल को संरक्षित करने की जरुरत
पृथ्वी पर उपलब्ध जल का केवल एक छोटा सा भाग ही पौधों जंतुओं और मनुष्यों के प्रयोग के लिए उपयुक्त होता है। व समुद्र का जल अधिक नमकीन होने के कारण सीधा उपयोग नहीं किया जा सकता तथा जल की मांग रोज बढ़ रही है। इसी प्रकार जनसख्या की वृद्धि के साथ - साथ जल का उपयोग भी बढ़ रहा है।
- छत के ऊपर वर्षा जल संग्रहण - इस प्रक्रिया में वर्षा के जल को भण्डारण टैंक में, पाइपों द्वारा पहुँचाया जाता है। तथा इस जल को पाइप जमीन के भण्डारण टैंक तक ले जाता है। जहाँ से मिट्टी इस पानी को सोप लेती है। और भौम जल की पुन; पूर्ति होती है।
- नालियों द्वारा - सड़क के किनारे बनी नालियां वर्षा के पानी को एकत्रित करके भूमि में सीधे पहुँचाती जाती है। अर्थात व्यक्तिगत स्तर पर हमें निष्ठापूर्वक जल की बचत करनी चाहिए। कम उपयोग (REDUCE) पुन: उपयोग (REUSE) पुन: चक्रण (RECYCLE) मूल मंत्र होना चाहिए।
भूमिगत जल
वर्षा जल के धरतलीय छिद्रों से रिस रिसकर कठोर शेलिए आवरण पर जमा जल भूमिगत जल कहलाता है। तथा भूमिगत जल को भौम जल भी कहा जाता है। वर्षा का जल लगभग 20 % भाग वाष्पित होकर फिर से वायुमंडल में चला जाता है।तथा शेष धरती द्वारा सोख लिया जाता है। व पृथ्वी पर जल की उपस्तिथि के कारण से पृथ्वी को नीला गृह की संज्ञा दी जाती है।
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