साक्षात्कार में अभाषिक पक्ष का संक्षिप्त विवरण
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| साक्षात्कार में अभाषिक पक्ष |
साक्षात्कार में अभाषिक पक्ष
साक्षात्कार के इस भाग में उस पक्ष को शामिल किया गया है। जिसका परीक्षण चयनकर्ता बीना किसी वार्तालाप के अभ्यर्थी के हाव - भाव व्यवहार के प्रदर्शन के आधार पर करते है। इस भाग का विश्लेषण निम्न उपविभागों में विभाजित करके किया जाता है -
- प्रदर्शन
- वाक्चातुर्य
- आत्मविश्वास
- मानसिक सतर्कता
- मानसिक दृंढ़ता
(A) प्रदर्शन: यहाँ साक्षात्कार के उन बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी। जिनका संबंध ज्ञान से न होकर व्यवहार से है। अर्थात NON-VERBAL PORTION OF THE INTERVIEW साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवार का प्रस्तुतिकरण (APPEARANCE) इसके अंतर्गत आएगा। इसके माध्यम से वे अपना व्यवहार, संस्कृति तथा अपना स्तर प्रदर्शित करते है। हालाँकि यह प्रस्तुतिकरण या APPEARANCE उम्मीदवार के व्यक्तित्व का ही एक भाग है।
- प्रदर्शन का आशय: प्रदर्शन (APPEARANCE) का सामान्य तौर पर 'बाह्रा शारीरिक बनावट' से अर्थ लगाया जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है। प्रदर्शन से तात्पर्य अभ्यर्थी के व्यक्तित्व के साक्षात्कार बोर्ड पर पड़ने वाले प्रभाव से है। साक्षात्कार बोर्ड पर सबसे पहला प्रभाव आपको देखकर ही पड़ेगा।
- कहा भी गया है। "First Impression is The Last Impression".
साक्षात्कार की दृष्टि से आपके प्रस्तुतीकरण या Appearance के कई भाग हो सकते है -
- वस्त्र
- हेयर स्टाइल
- भावाभिव्यक्ति
- चलने का ढंग तथा साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश का तरीका
- साक्षात्कारकर्ता के सामने बैठने का तरीका
- वापस आने या साक्षात्कार कक्ष छोड़ने का तरीका
वस्त्र
साक्षात्कार के सन्दर्भ में आपकी वेशभूषा का काफी महत्व है। साक्षात्कार के लिए तत्कालीन फैशन के अनुरूप, सुविधाजनक तथा प्रेस किए हुए कपडे पहने जाने चाहिए। गर्मी के मौसम में सूट पहनना विचित्र लग सकता है। साक्षात्कार के लिए नए कपडे पहनने से बचना चाहिए। क्योकि इससे साक्षात्कार के दौरान आपको असुविधा महसूस हो सकती है। जींस इत्यादि कभी - कभी पहने जानेवाले कपडे भी आपको नहीं पहनने चाहिए। कपड़ों की जेब में आवश्यक कागजात, डायरी रुपए इत्यादि ठूस कर न रखे। यह आपकी असुविधा को बढ़ाते है। तथा आपकी लापरवाही की ओर संकेत करते है।
- कपड़ों के सन्दर्भ में यह कहावत ध्यान रखे - "भोजन अपनी पसंद का करना चाहिए। तथा कपडे दूसरों की पसंद के पहनने चाहिए".
अर्थात कपड़ों के सन्दर्भ में खास ध्यान देने की बात यह है की वे दूसरों पर अच्छा प्रभाव डाले। आप स्वयं को 'यूनिक' प्रदर्शित करने का प्रयास न करे। यदि आप 'टाई लगाते हो, तो टाई अवश्य लगाए।
कपड़ों की ही तरह जूतों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। ये अच्छी तरह पॉलिस किए हुए होने चाहिए। तथा बहुत आवाज करने वाले नहीं होने चाहिए। यदि साक्षात्कार बोर्ड का कोई सदस्य आपके ड्रेसिंग सेन्स की प्रशंसा करता है। तो शरमाएँ नहीं। प्रशंसा के लिए उन्हें धन्यवाद करे। प्रशंसा किए जाने पर आपको 'नर्वस' होने की आवश्यकता नहीं है।
कभी - कभी आपकी पेंट शर्ट या रुमाल का रंग भी साक्षात्कार बोर्ड के सदस्य पूछ लेते है। ऐसा वे साक्षात्कार के दौरान आपकी मन: स्तिथि का पता लगाने के लिए करते है।
हेयर स्टाइल
साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश करने से पूर्व देख लेना चाहिए की आपके बाल ठीक से व्यवस्तिथ हो, इसके लिए साथ में एक कंघी रखे तथा कक्ष में प्रवेश से पूर्व कंघी अवश्य कर लें। यह ध्यान रखे की साक्षात्कार से ठीक पूर्व हेयर कट न कराएँ। इससे आपके चेहरे में परिवर्तन आ जाता है। और आप कुछ असुविधा भी अनुभव या महसूस कर सकते है।
भावाभिव्यक्ति
आपका चेहरा आपके दिमाग का सूचकांक है। साक्षात्कारकर्ता आपके चेहरे की भावाभिव्यक्ति से ही काफी कुछ जानकारी प्राप्त कर लेते है। साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश करते समय चेहरे पर हल्की मुस्कान रखे और विनर्मतापूर्वक पूछे "क्या मै अंदर आ सकता हूँ ?"
यह मुसकराहट आप तब तक रखे जब तक आप सदस्यों का अभिवादन कर रहे हो। मुसकराहट आपके आत्मविश्वास की पुष्टि करती है। तथा सहज होने में आपकी सहायता करती है। जबकि उदास या गंभीर चेहरा आप और साक्षात्कारकर्ता दोनों पर अतिरिक्त दबाव बनाता है। कोई भी अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारी के रूप में मेहनती, मिलनसार, एवं हंसमुख व्यक्ति को वरीयता देगा न की बहुत ज्ञानवान अनुभवी परन्तु रूखे व्यक्ति को।
कमरे में मुस्कुराते हुए प्रवेश करे, लेकिन साक्षात्कार प्रारंभ हो जाने के बाद भी मुस्कुराते ही न रहे। साक्षात्कार के दौरान भाव - भंगिमा संतुलित बनाए रखे।
साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश
साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश से पहले अपने कपड़ों एवं बालों को सही कर लें। कक्ष में प्रवेश करते समय उस व्यक्ति को धन्यवाद दे जिसने आपको साक्षात्कार कक्ष का मार्ग दिखाया है। यदि आप दरवाजे को स्वयं खोलते है। तो प्रवेश करने से पूर्व अनुमति मांगे। तथा अनुमति प्राप्त हो जाने पर दरवाजे को बिना पीछे मुड़े धीरे से बंद कर दे और मुस्कराहट की भाव - भंगिमा बनाते हुए साक्षात्कार बोर्ड के सभी सदस्यों का अभिवादन करे - "नमस्ते सर" या मेम।
वैसे तो यह छोटी - छोटी बाते है लेकिन साक्षात्कार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साक्षात्कार से पूर्व आपको इन सब बातों का पर्याप्त अभ्यास करना चाहिए।
चलने का तरीका
साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश के समय आपके चलने का तरीका आपके 'आत्मविश्वास' को दर्शाता है। और इस बात का विश्लेषण बोर्ड में बैठा 'मनोविज्ञान विशेषज्ञ' करता है। अत: आपके चलने का तरीका आत्मविश्वास पूर्ण होना चाहिए। इसमें तेजी होनी चाहिए। आपको अपने चलने के तरीके से यह दर्शा देना होगा की आप आत्मविश्वास से युक्त, महत्वकांक्षी नवयुवक है तथा सफलता के लिए सभी बाधाओं को पार कर लेने की क्षमता रखते है।
कहने का तात्पर्य यह है की जब आप साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश करे, तो मुस्कराहट से परिपूर्ण चेहरे के साथ, सम्मानपूर्वक प्रवेश करे। जिस क्षण आप कक्ष में प्रवेश कर रहे हो, आपका उद्देश्य होना चाहिए। की आप साक्षात्कारकर्ताओं के समक्ष बैठने से पूर्व ही उनका मन मोह लें। आत्मविश्वासपूर्वक चलने, सिर ऊँचा रखने, दृष्टि सीधी और सधी हुई रखने तथा दृंढ चाल रखने का अभ्यास करे। ये बाते आपके आत्मविश्वास एवं महत्वाकांक्षा की पुष्टि करती है।
बैठने का तरीका
जब आपसे बैठने के लिए कहा जाए, तो उन्हें धन्यवाद दे और कुर्सी (CHAIR) को थोड़ा -सा अपनी ओर खींचकर बैठे। अध्यक्ष के बिलकुल सामने न बैठे। थोड़ा सा कोणीय परिवर्तन रखे। साक्षात्कारकर्ता की मेज से लगभग एक मीटर की दूरी बनाकर बैठे।
साक्षात्कारकर्ता की मेज अथवा उस पर रखी किसी वस्तु को न छुएँ। अपनी कुर्सी पर बैठकर कोई आवाज न करे। कुर्सी पर बैठकर बार - बार दिशा परिवर्तन न करे। इससे आभास होगा की आप असहज है। साक्षात्कार कक्ष में बैठने का ढंग भी महत्वपूर्ण है। आपकी पीठ एकदम सीधी होनी चाहिए। कुर्सी के पूरे हिस्से पर बैठे। तथा पैरों को जमीन पर ठीक ढंग से जमाकर रखे। कुर्सी के आधे हिस्से में बैठना उम्मीदवार की हड़बड़ी और आत्मविश्वास में कमी को दर्शाता है। कुर्सी के अगले हिस्से पर बैठना, शर्मीली पुष्टि, नीची निगाहें उम्मीदवार को पहली निगाह में ही छांट देने के लिए पर्याप्त है।
साक्षात्कारकर्ता के समक्ष बैठने के ढंग के संबंध में निम्न 6 बिंदुओं पर ध्यान रखे -
(1) सीधा तथा आराम से बैठे, पूरी सीट को ग्रहण करे तथा चेहरे पर मुस्कराहट होनी चाहिए।
(2) नजरे अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की ओर रखे। शर्मीले न बने तथा नजरों को नीचा न रखे या पूरे समय केवल एक ही व्यक्ति पर नजरे न गड़ाएं रखे।
(3) एक पैर दूसरे पर चढ़ा कर न रखे। न ही पैर जमीन पर खटखटाएं।
(4) सभी सदस्यों पर एक भरपूर निगाह डालें और निगाहों के माध्यम से ही उन्हें प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित करे।
(5) मेज या कुर्सी न थपथपाएं तथा बटन, पेन अथवा फाइल से न खेलें।
(6) अपने बैठने की दिशा को बार - बार परिवर्तित न करे। साक्षात्कारकर्ताओं को अपने बराबर का ही माने। वे उपयुक्त उम्मीदवारों के चयन के लिए ही यहाँ बैठे है, अत: इस कार्य में उनकी मदद करे।
साक्षात्कार कक्ष छोड़ने का ढंग
साक्षात्कार कक्ष छोड़ते समय भी आपको अपने दिमाग को चेतना की स्तिथि में रखना है। तथा साक्षात्कार कक्ष छोड़ने की हड़बड़ी नहीं दर्शनी है। आपको 'चलो मुक्ति मिली' या जान बची लाखों पाए' इस प्रकार का भाव चेहरे पर नहीं लाना है। साक्षात्कार कक्ष छोड़ते समय साक्षात्कार बोर्ड के सभी सदस्यों को धन्यवाद करे। यदि अध्यक्ष या बोर्ड का कोई सदस्य आपसे हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ाता है, तो आत्मविश्वास पूर्वक प्रशन्नचित्त हाथ मिलाए। किसी प्रकार का संकोच प्रदर्शित न करे। इसके पश्चात् कुर्सी को यथा स्थान रखे तथा साधे हुए क़दमों से साक्षात्कार कक्ष से बाहर निकले। कक्ष से निकलते हुए यदि दरवाजा खोले तो उसे पुन: बंद कर दे। साक्षात्कार कक्ष से बाहर निकलते हुए कभी पीछे मुड़कर न देखे। कुल मिलाकर साक्षात्कार कक्ष से बाहर आप इस भाव से निकले की आपका चयन पद हेतु निश्चित हो चूका है, ऐसा आपको विश्वास है।
वाक्चातुर्य
जैसा कि हमनेआपको पहले ही बताया, साक्षात्कार एक मौखिक परीक्षा है। इसमें आपके द्वारा भाषिक रूप से उत्तर देने पर आपके ज्ञान की परीक्षा की जाती है। परन्तु इसी के सामानांतर आपका अभाषिक परीक्षण भी चलता रहता है। उम्मीदवार की वाक कला का परीक्षण भी इनमे से एक है। एक उम्मीदवार की वाक कला का परीक्षण उसकी आवाज की स्पष्टता, रिद्म अथवा टोन 'गति तथा बात' करने के ढंग एवं मुद्राओं के माध्यम से किया जाता है।
आवाज की स्पष्टता
आवाज की स्पष्टता से हमारे आत्मविश्वास की परख होती है। यदि आप अपनी बात अस्पष्ट ढंग से अथवा धीमी आवाज में रखते है। तो इसका तात्पर्य है की जो बात आप कहने जा रहे है। उसके प्रति आपको स्वयं ही अविश्वास है। अत: स्पष्ट है की जो कुछ आप बोले उसमे स्पष्टता हो एवं उच्चारण शुद्ध होना चाहिए। जिससे आपका प्रत्येक शब्द साक्षात्कार बोर्ड के सदस्य सुन सके तथा आपके विचारों से अवगत हो सके। स्पष्टता से यहाँ तात्पर्य यह है की आप प्रत्येक शब्द को निर्धारित उच्चारण के साथ इतना स्पष्ट बोले जितना आप बोल सकते है।
ऐसे शब्दों का प्रयोग कतई न करे जिनके उच्चारण में आपको कठिनाई उत्पन्न होती हो। आपकी टोन जीवंत एवं सुनाई पड़ने योग्य होनी चाहिए। खरखराती आवाज में न बोले। इस प्रकार बोले की श्रोता को आपकी आवाज मधुर संगीत प्रतीत हो। अपने भाषण को मधुर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करे। अपनी आवाज की गति बहुत तेज न रखे। गति तेज रखने से यह आभास होगा की आप बहुत हड़बड़ी में है और अति शीघ्र साक्षात्कार कक्ष से मुक्ति पाना चाहते है। अर्थात आप असहज और घबराए हुए है। अपनी आवाज इतनी धीमी भी न रखे की आपके आत्मविश्वास में कमी प्रदर्शित हो।
ऐसा, वैसा, शायद, अगर, मगर, मेरे ख्याल से, हमें लगता है इत्यादि शब्दों का प्रयोग तथ्यात्मक प्रस्तुति के दौरान न करे। हालाँकि विरोधाभासी विचारों को प्रस्तुत करते समय आप इन शब्दों का प्रयोग कर सकते है।
मुद्रा
आपके बात करने का ढंग पूरी तरह से वार्ता के दौरान बनाई जानेवाली मुद्रा पर निर्भर करता है। 'मनोविज्ञान विशेषज्ञ' आपके द्वारा बनाई जाने वाली मुद्राओं या हाव - भाव को देखकर आपके भावनात्मक स्थायित्व, आत्मविश्वास, नेतृत्व गुण, इत्यादि का आकलन करता है। अत: इस बात का ध्यान रखे की साक्षात्कार के दौरान नकारात्मक भाव - भंगिमाएं न बनाएं जैसे वार्ता के दौरान कुर्सी पर पैर - हिलाना, बार - बार स्थान बदलना, नाक या आँख छूना, कुछ कुरेदना इत्यादि।
हालाँकि कुछ भाव - भंगिमाएं साकारात्मक प्रभाव छोड़ती है, जैसे -
- हाँ या ना के रूप में उत्तर देते समय, साथ में उसी के अनुरूप सिर हिलाना।
- आश्चर्य के समय भौहों को फैलाना।
- अपने विचारों को और प्रभावी बनाने के लिए हाथों को हिलाना।
- गंभीर विषय पर उसी के अनुरूप मुद्रा बनाना।
- धन्यवाद कहते समय, मुस्कुराना। हालाँकि मिरर के सामने नियमित अभ्यास से, इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है।

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