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Madhya Pradesh Ki Jalvayu Ko Prabhavit Karne Wale Karak

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 मध्यप्रदेश की जलवायु म0प्र0 की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक

Madhya Pradesh Ki Jalvayu Ko Prabhavit Karne Wale Karak
मध्यप्रदेश की जलवायु

 मध्यप्रदेश की जलवायु

किसी भी क्षेत्र में लंबे समय तक पायी जाने वाली, ताप, वर्षा, आद्रता आदि की मात्रा तथा वायु की गति का औसत रूप में पाया जाना वहां की जलवायु कहलाती है। 

निर्धारित तत्व - 

  • वर्षा का समय तथा मात्रा 
  • हवा की गति की औसत अवस्था
  • तापमान की स्तिथि
किसी स्थान की दिन - प्रतिदिन की वायुमण्डलीय दशा को मौसम कहते है। और मौसम के ही दीर्घकालिक औसत को  जलवायु  कहा जाता है। भारत के मध्य में स्तिथ होने के कारण मध्यप्रदेश में मानसूनी जलवायु की सभी विशेषताएं पायी जाती है। इस प्रकार मध्यप्रदेश की जलवायु उष्ण कटिबंधीय मानसूनी जलवायु है।

 मध्यप्रदेश की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक

  1. समुद्र से दूरी - अधिक होने से तापान्तर अधिक रहता है। 
  2. भूमध्य रेखा से दूरी - मध्यप्रदेश उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में स्तिथ होने के कारण  यहाँ पर उष्ण कटिबंधीय जलवायु पाई जाती है।  
  3. कर्क रेखा - कर्क रेखा प्रदेश के मध्य से गुजरने से जून महीना अधिक गर्म हो जाता है। 
  4. पर्वतों की स्तिथि - सतपुड़ा तथा विंध्यांचल पर्वत श्रेणी में वर्षा अधिक होती है। 

जल वायु के आधार पर मध्यप्रदेश को चार भागों में विभाजित किया गया है -

(1) उत्तर का मैदान - इसमें बुंदेलखंड, मध्यभारत, रीवा, पन्ना का पठार शामिल है। समुद्र से दूर होने के कारण यहाँ पर गर्मी में अधिक गर्मी और ठण्ड में अधिक ठण्ड पड़ती है। यहाँ गर्मियों में औसत तापमान 40 डिग्री से 45 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है। तथा सर्दियों में औसत तापमान 15 डिग्री से 18 सेंटीग्रेड रहता है। इसलिए यह क्षेत्र उप - अर्द्ध की श्रेणी में आता है। 

(2) मालवा का पठार - यहाँ की जलवायु सम पाई जाती है। अर्थात यहाँ पर न तो ग्रीष्म ऋतू में अधिक गर्मी और न शीत ऋतू में अधिक ठण्ड पड़ती है। यहाँ सबसे अधिक वर्षा अरब सागर के मानसूनों से होती है। तथा चीनी यात्री फरहान ने इसे विश्व की श्रेष्ठ जलवायु बताया है। 

(3) विन्ध का पहाड़ी क्षेत्र - विंध्यांचल पर्वत का क्षेत्र सम जलवायु क्षेत्र है। इसमें अधिक गर्मी नहीं पड़ती है। और ठण्ड में भी, साधारण ठण्ड पड़ती है। तथा पचमढ़ी और अमरकंटक इसी क्षेत्र के अंतर्गत आते है। 

(4) नर्मदा घाटी क्षेत्र - यह क्षेत्र कर्क रेखा के लगभग समान्तर होने के कारण गर्मियों में इस क्षेत्र में तेज गर्मी पड़ती है। लेकिन सर्दियों में सर्दी सामान्य ही रहती है। तथा चट्टानों वाले क्षेत्र कई बार 46 डिग्री C से 50 डिग्री C के बीच ग्रीष्म ऋतू में गर्म हो जाते है। 

जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया

सूर्य की स्तिथि में परिवर्तन होने से ताप और दाब में परिवर्तन होने से जलवायु में परिवर्तन आता है। तथा 21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरायण हो जाता है। इससे उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य की किरणे सीधी पड़ती है। व दक्षिणी गोलार्द्ध में तिरछी पड़ती है। इसलिए उत्तरी गोलार्द्ध में स्तिथ देश भारत तथा मध्यप्रदेश में तापमान बढ़ने लगता है। और गर्मी प्रारंभ हो जाती है।

मध्यप्रदेश के कृषि जलवायु क्षेत्र एवं उद्योग

  • कपास व गेहूँ का क्षेत्र - सीहोर, देवास, उज्जैन, मंदसौर, राजगढ़, एवं शाजापुर।
  • कपास का क्षेत्र - पश्चिमी मध्यप्रदेश खंडवा, खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, रतलाम, धार
  • गेहूं व ज्वार का क्षेत्र - मालवा का पठार एवं बघेलखण्ड का मध्य भाग ग्वालियर, भिंड, मुरैना।
  • ज्वार का क्षेत्र - गुना, शिवपुरी, श्योपुर एवं पश्चिमी मुरैना। 
  • चावल का क्षेत्र - बघेलखण्ड क्षेत्र (मंडला, बालाघाट, सीधी, जबलपुर, सिवनी, शहडोल)
  • चावल व कपास का क्षेत्र - खंडवा। 
  • चावल, ज्वार, कपास का क्षेत्र - छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी। 

मौसम के आधार पर 3 कृषि क्षेत्र है - 

  • रबी की फसलें - गेहूं, चना, मटर, सरसों, अलसी, मसूर, राई। 
  • खरीब की फसलें - चावल, सोयाबीन, कपास, गन्ना, मूंगफली, तिल, तुअर, ज्वार, मक्का और सूर्यमुखी।
  • जायद की फसलें - खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूज, लोकी, कद्दू आदि इनमे सब्जी अधिकांश आती है। 
  • व्यापारिक फसलें - सोयाबीन, कपास, गन्ना, तिल, तम्बाकू, अफीम, पटसन, अलसी आदि।
  • खाद्यान फसलें - गेहूं, चना, चावल, ज्वार, मक्का, बाजरा, दालें, तिलहन।

प्रदेश का 5 कृषि प्रदेशों में विभाजन

  • पश्चिम में, काली मिट्टी का प्रदेश - इसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, हरदा, रतलाम, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर आदि सम्मिलित है। 
  • उत्तर में ज्वार गेहूं का प्रदेश - इसमें ग्वालियर, भिंड मुरैना, दतिया, गुना, श्योपुर, छतरपुर, शिवपुरी एवं टीकमगढ़ जिले आते है। 
  • चावल गेहूं का प्रदेश - इसमें पन्ना, सतना, कटनी, उमरिया, जबलपुर, व सिवनी आते है। 
  • मध्य में गेहूं का मालवा प्रदेश - इसमें भोपाल सीहोर, होशंगाबाद, दमोह, सागर, विदिशा, रायसेन, व नरसिंहपुर जिले शामिल है। 
  • संपूर्ण पूर्वी मध्यप्रदेश चावल का प्रदेश - इसमें बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, अनूपपुर, सिंधी, रीवा, शहडोल आदि जिले सम्मिलित है। 

महत्वपूर्ण तथ्य

  • मध्यप्रदेश में स्थापित होगा एशिया का सबसे बड़ा दलहन अनुसंधान केंद्र। 
  • चीन में बनने वाला दलहन अनुसंधान केंद्र अब सीहोर के अमलाहा में बनेगा।
  • रतलाम जिले में शीघ्र ही केंद्र सरकार 'अंगूर अनुसंधान केंद्र खोलने जा रही है। 
  • कृषि उद्योग विकास निगम द्वारा प्रदेश का पहला 'सेलरिश' जैविक खाद्य संयंत्र की स्थापना भोपाल में की है। 
  • देश में कुल सोयाबीन उत्पादन का 80 % से अधिक मध्यप्रदेश में होता है।
  • प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र के 22 % भाग पर धान की खेती की जाती है। 
  • चावल प्रदेश (मध्यप्रदेश) की सर्वाधिक महत्वपूर्ण फसल है।
  • प्रदेश का खाद्यान उत्पादन में देश में चौथा स्थान है। 
  • सोयाबीन, चना, अलसी, दलहन, अफीम, के उत्पादन में प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है। 
  • ज्वार, तिल, अरहर, व तिलहन के उत्पादन में प्रदेश का देश में, द्वितीय स्थान है।

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