इंटरव्यू में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर कैसे दे ? एवं आत्म - निंदात्मक उत्तरों से कैसे बचे
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| इंटरव्यू में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर कैसे दे |
इस लेख में आज हम साक्षात्कार में पूछे जाने वाले प्रश्नों, का उत्तर कैसे दे ? विषय पर चर्चा करने जा रहे। जोकि उन उम्मीदवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जो इस चरण या प्रक्रिया में कमजोर है। कुछ उम्मीदवार ऐसे होते है। जो अपने घर से पूरी तैयारी करके निकलते है। किन्तु उन्हें सही तरीके से अन्य के समक्ष अपने विचार रखना नहीं आता है। या आत्म - निंदात्मक (खुद की आलोचना) करते रहते है। या अपने बारे में नेगेटिव सोचते रहते है।
बस इसी वजह से बहुत मेहनती उम्मीदवार साक्षात्कार का पड़ाव पास नहीं कर पाते है। और उन्हें बिना वजह परेशानी भोगनी पड़ती है। इस लेख में हमने बतौर आपको साक्षात्कार में पूछे जाने वाले प्रश्नों का, उत्तर कैसे देना चाहिए। इस बारे में चर्चा की है। साथ ही कुछ - कुछ अतिरिक्त मूल बातों पर भी चर्चा की है। जिनका आपको हमेशा ध्यान रखना चाहिए।
साक्षात्कार बोर्ड के प्रश्नों को ध्यानपूर्वक सुनें (MOST IMPORTANT)
किसी भी पूछे गए प्रश्न का उत्तर देने के लिए सबसे पहला कदम यह होता है। कि आपसे क्या पूछा जा रहा है। उस पूरा ध्यान दे और पूरी तरह से समझे की प्रश्न का मर्म क्या है। यदि किसी कारणवंश आप प्रश्न को ठीक प्रकार से नहीं समझ पाते है। मान लीजिए आपका ध्यान बीच में भांग हो गया और इसी वजह से आप पूरा प्रश्न या प्रश्न के किसी भाग को नहीं समझ पाए है। ऐसी दशा में आप साक्षात्कार लेने वालीं से बिना झिझके कहें "सर मुझे क्षमा कीजिए" या "सर मैं प्रश्न को ठीक प्रकार से नहीं समझ पाया हूँ" प्रश्न को समझे बिना उसका गोलमोल उत्तर देने से ज्यादा बेहतर है की आप साक्षात्कार लेने वालों से विनर्मतापूर्वक प्रश्न को दोहराने का आग्रह करे।
उत्तर देने के पहले थोड़ा विचार करे
सबसे महत्वपूर्ण है कि प्रश्न पूछने वाले को पहले उसका प्रश्न पूरा कर लेने दे। तथा बीच में उसे न टोके। इसके अतिरिक्त प्रश्न समाप्त होते ही तुरंत उसका उत्तर न देने लगे। भले ही आप प्रश्न का पूरा उत्तर जानते है। या उत्तर से पूरी तरह से परिचित हो। फिर भी कुछ समय के लिए अवश्य रुकना चाहिए।
अपना उत्तर देने से पहले कुछ सेंकेंड इंतजार अवश्य करे। चुप्पी के ये क्षण काफी महत्वपूर्ण होते है। क्योकि इस समय आपको विचारों को आकार प्रदान करने का अवसर मिल जाता है। समय के इस छोटे से भाग में आप प्रश्न को समझते है तथ्यों सूचनाओं मतों आदि को याद करते है। तथा अपने उत्तर को सही रूप देते है। चुप्पी सदैव बोलने वाले को निरंतर बोलने के लिए प्रोत्साहित करती है। साक्षात्कार लेनेवाले व्यक्ति के द्वारा सवाल पूछे जाने के पश्चात् कुछेक पल का मौन भी उसे अपने प्रश्न को विस्तार से बताने या उसे सरल रूप से पूछने के लिए उकसाता है। अत: आवश्यक है। कि अपना उत्तर देने से पहले कुछ समय मौन रहे। यदि आप अपना उत्तर पूरा कर चुके है। तथा बोर्ड के सदस्य चुप है तो फिर और आगे बोलने के लिए पलोभित या उत्सुक न हो। बोर्ड के सदस्यों के चुप रहने का यह अभिप्राय नहीं होता है। की वे आप से कुछ और स्पष्टीकरण या और आगे भी उत्तर चाहते है। हो सकता है। की इस समय वे आपके उतर का आकलन कर रहे हो। या फिर अगला प्रश्न पूछने की तैयारी कर रहे हो। कृपया यह अवश्य याद रखे की श्रोता का मौन वक्ता को और अधिक बोलने के लिए पलोभित करता है। मौन का उपयोग अपने लाभ के लिए करना चाहिए।
सावधानीपूर्वक उत्तर दे
उत्तर देते समय उत्तेजना और कभी - कभी हो जानेवाली घबराहट के बावजूद अपनी मानसिक स्थिरता एवं शांत मनोभाव बनाए रखे। यदि आपके सम्मुख कोई ऐसा प्रश्न रखा जाता है। जिसे आप नहीं समझ सके। या आप उसका उत्तर नहीं जानते है। तो घबराएं नहीं न ही विचलित हो। अपनी शांत मुद्रा एवं एकाग्रता बनाए रखे। तथा सदस्यों प्रश्न को फिर से पूछने या और अधिक स्पष्ट करने का विनर्म आग्रह करे।
हालाँकि यदि आप प्रश्न का उत्तर नहीं जानते हो तो विनर्मतापूर्वक यह कहना ज्यादा उचित होगा की " मै इसका उत्तर नहीं जनता " पर किसी भी दशा में घबराएं नहीं, न ही अपना मानसिक संतुलन खोएं। कई बार साक्षात्कार लेनेवाला कोई सदस्य आप से ऐसा कोई प्रश्न पूछ लेता है। जिसका उत्तर आप बहुत अच्छी तरह से जानते है। ऐसी दशा में उत्तर देने में न तो जल्दबाजी दिखाए और न ही उत्तेजित हो। क्योकि सवालों का इस प्रकार जवाब देना है की यह प्रतीत हो की अपने सवाल को सुना समझा और उसी समय जवाब तैयार किया यह एक अच्छी निति है। आपका जवाब स्वत: स्फूर्त प्रतीत होना चाहिए। न की पूर्व निश्चित।
उत्तर में सूचनात्मक और तथ्यात्मक आंकड़े भी समाहित हो
आपसे जो पूछा गया है। उसे बताने की बजाय जो आप जानते है। वह बताने की प्रवृति से बचना चाहिए। उत्तर सटीक होना चाहिए। एवं पूछे गए प्रश्न के अनुरूप होना चाहिए। हमारे पास जो भी सूचनाएं है। उन्हें संशोधित कर उनका उपयोग प्रश्न की प्रकृति के अनुसार करना चाहिए। बोर्ड को प्रभावित करने के लिए ऐसे तथ्यों एवं सूचनाओं को बताना या जोड़ना जो प्रश्न से दूर का या जरा - सा ही संबंध रखती हो। अक्सर हानि ही करता है। इससे बोर्ड के सदस्यों को लगेगा की अभ्यर्थी में विषय को समझने की पर्याप्त क्षमता नहीं है। तथा विषय से भटकने की उसकी आदत है। अत: इस प्रकार के किसी भी प्रयास से बचे। इससे दोहरी हानि होती है। एक और उत्तर में दी गई अनुपयुक्त सुचना साक्षात्कार लेनेवालों को बीच में बोलने और ऐसे तथ्यों, आंकड़ों, विचारों आदि पर प्रतिप्रश्न करने को उकसाती है। दूसरा ऐसे इंटरव्यू की प्रक्रिया पथ से भटक जाती है। और आप महत्वपूर्ण तथा प्रासंगिक बिंदुओं को सामने रखने के अवसर से वंचित रह जाते है।
वरीयताक्रम में सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय को पहले रखे
साक्षात्कार मुख्य परीक्षा से बिलकुल भिन्न प्रक्रिया है। वहां अभ्यर्थी के पास अपना उत्तर बनाने के लिए समय और अवसर होता है। तथा अक्सर सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदुओं को निष्कर्ष के रूप में लिखने के लिए छोड़ दिया जाता है। जिससे की अंतिम प्रभाव अच्छा हो। लेकिन साक्षात्कार में उत्तर सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदुओं से प्रारंभ किया जाना चाहिए। इसके बाद अन्य संबद्ध बिंदुओं का उल्लेख होना चाहिए। जैसा की पहले भी कहा जा चूका है। साक्षात्कार लेनेवाले कई बार बीच में भी प्रति - प्रश्न कर देते है। या कोई और प्रश्न कर बैठते है। जिससे आप सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदुओं को बताने का अवसर खो सकते है। याद रखे। साक्षात्कार में इधर - उधर की बाते नहीं की जा सकती आपको सीधे काम की बाते करनी होगी।
उत्तर सारगर्भित और संतुलित हो
उत्तर संक्षिप्त, कसा हुआ एवं सटीक होना चाहिए। इसमें किसी प्रकार का ढीलापन नहीं होना चाहिए। इसमें शब्दों का आडंबर या संबंधित या असंबद्ध तथ्यों और विषय से हटकर उत्तरों के लिए कोई स्थान या अवसर नहीं है। आपका उत्तर केवल प्रश्न से संबंधित होना चाहिए। और उसमे व्यर्थ की बात नहीं होनी चाहिए।
प्रश्नों के उत्तर में अपने दृष्टिकोण एवं मत को भी रखे
कभी - कभी बोर्ड अभ्यर्थियों से ऐसे प्रश्न पूछता है। जिनमे वह किसी मुद्दे पर उनका दृष्टिकोण या मत जानना चाहते है। किसी भी विषय पर विभिन्न क्षेत्र विशेषज्ञों का अपना - अपना दृष्टिकोण हो सकता है। किन्तु वे मुद्दों को दूसरों के दृष्टिकोण से भी देखते है। और समग्र रूप में भी। इस प्रकार किसी विषय पर अंतिम निर्णय विभिन्न मामलों के समग्र महत्व के आधार पर तथा अन्य लोगों के द्रष्टिकोण और विचारों को ध्यान में रखने के बाद ही लिया जा सकता है। इसलिए भावी प्रशासक एवं साक्षात्कार देनेवाले उम्मीदवार के रूप में आप में अन्यों के दृष्टिकोण तथा विचारों को पूर्ण सूक्ष्मता से और समग्र रूप में देखने की योग्यता होनी चाहिए। इसलिए एक और अपने विचारों को स्पष्ट करते समय आपको उस विषय के विभिन्न पहलुओं को तथा उसके सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों को भी अवश्य उजागर करना चाहिए। और दूसरी ओर यह भी स्पष्ट होना चाहिए। की किसी खास मुद्दे पर आपका क्या पक्ष है।
अपना उत्तर ईमानदारीपूर्वक दे
उम्मीदवारों को प्राय: इस अवस्था का सामना करना पड़ता है। जब वे यह निर्णय नहीं कर पाते की किसी प्रश्न का उत्तर नहीं जानने या उत्तर के प्रति अनिश्चित होने पर वे प्रश्न को छोड़ दे या ऐसा उत्तर दे जो शायद गलत हो। वे इसके लिए भी अनिश्चय की स्तिथि में रहते है। कि क्या वे अनुमान से ऐसे तथ्य और आंकड़े बताए जिनके बारे में वे आश्वस्त नहीं है। या अपनी उस संबंध में जानकारी न होने की बात को उजागर कर दे -
ऐसी स्तिथि निम्नलिखित तीन दशाओं में उत्पन्न होती है-
- जब साक्षात्कार देने वाला किसी प्रश्न को ठीक से सुन या समझ नहीं पाता है।
- जब वह प्रश्न तो समझ लेता है। लेकिन उसके उत्तर के प्रति पूर्ण आश्वस्त नहीं होता है।
- जब उसे निश्चित रूप से पता है। की वह इस प्रश्न का उत्तर नहीं जानता है।
इन सभी परिस्थितियों में ईमानदार और सत्य बोलने का रवैया ही सर्वश्रेष्ठ विकल्प है। पहली स्तिथि में आपको सलाह दी जाती है। की आप विनम्रतापूर्वक साक्षात्कार लेनेवाले से प्रश्न को दोहराने या और स्पष्ट करने का आग्रह करे। इस संबंध में आप कुछ इस तरह का आग्रह कर सकते है -
- क्षमा कीजिए, सर क्या आप प्रश्न को दोहराने की कृपा करेंगे।
- या
- सर मैं प्रश्न ठीक तरह से नहीं समझ पाया हूँ। क्या आप और अधिक स्पष्ट करने की कृपा करेंगे।
दूसरी स्तिथि किसी कारणवंश यदि आप उत्तर के प्रति पूर्ण आश्वस्त न होतो विनम्रतापूर्वक कहे "सर, मैं इस बारे में पूर्ण आश्वस्त नहीं हूँ। पूरी तरह नहीं जानता हूँ।
यदि फिर भी बोर्ड के सदस्य आप से उत्तर देने को कहते है। तो फिर अपनी जानकारी के अनुसार आप उस विषय के बारे में बताए।
तीसरी स्तिथि में यदि आप प्रश्न का सही उत्तर नहीं जानते है। विशेष रूप से तथ्यात्मक या ज्ञान आधारित प्रश्न से संबंधित उत्तर, तो विनम्रतापूर्वक जानकारी न होने को स्वीकार कर लें। इसके लिए अपने को अपराधी मानने या निराश होने की बिलकुल आवश्यकता नहीं है। ध्यान रखे की आपके ज्ञान के स्तर की जाँच प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में पहले ही हो चुकी है तथा साक्षात्कार के लिए आपका चयन लाखों अभ्यर्थियों के बीच से किया गया है। इसके अलावा कुछ तथ्यों या मुद्दों की जानकारी न होना स्वाभाविक है। इस तरह जानकारी के अभाव को व्यक्त कर आप अपना और बोर्ड का बहुमूल्य समय बचाते है। तथा अपने आपको इस बात का अवसर देते है। की आप से किसी अन्य ऐसे क्षेत्र से संबंधित प्रश्न पूछा जा सके जिसके बारे में आप जानकारी रखते हो। इसके अलावा, विनर्मता के साथ किसी विषय के बारे में अपनी अनभिग्यता को स्वीकार कर लेना आपकी ईमानदारी का परिचायक है जो की एक सिविल सेवक के अत्यंत वांछनीय गुणों में से एक है।
आदर्शवादी नजरिए का पालन करे
अभ्यर्थी के विचार आदर्शहीन तथा आशाविहीन नहीं होने चाहिए। इसका अभिप्राय यह है की अभ्यर्थी के विचारों में आदर्श एवं आशा भी परिलक्षित होनी चाहिए। साथ ही उसके विचारों में सामाजिक, आदर्शों एवं सिद्धांत लोकतंत्र, मानवाधिकार, विधि का शासन, अहिंसा ईमानदारी आदि के हो सकते है।
सत्यता, स्पष्टवादिता एवं चतुराई के साथ उत्तर दे
साक्षात्कार बोर्ड अत्यधिक अनुभवी एवं विद्वान लोगो से मिलकर बना होता है। जो की अभ्यर्थी के उत्तरों में कही गई बात के अलावा उसके व्यवहार, अभिव्यक्ति एवं संपूर्ण हावभाव का बड़ी बारीकी से निरिक्षण करता है। इसलिए ईमानदारी न बरतना बेवकूफी होगी और सत्यवादी होना सर्वश्रेष्ठ विकल्प। परन्तु कई बार अभ्यर्थियों के विचारों के कई ऐसे पहलु होते है। जो न तो पूर्णत: श्वेत होते है और न श्याम बल्कि इनके बीच के यानी उचित और अनुचित विचारों का एक सम्मिश्रण होते है।
आत्म - निंदात्मक उत्तरों से बचे या स्वयं की आलोचना न करे
अपने स्वयं के व्यवहार की अकारण आलोचना करने से हमेशा बचे। अधिकारी के रूप में अभ्यर्थी से सदैव सकारात्मक होने एवं अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने वाला व्यक्ति होने की आशा की जाती है। वे लोग जो स्वयं में विश्वास नहीं रखते है। या अपनी क्षमता के प्रति हीन भावना से ग्रस्त है। वे ऐसे पदों के योग्य नहीं जहाँ नेतृत्व की आवश्यकता है। अत: अनावश्यक अपनी कमियों को बताने या आत्म-निंदात्मक उत्तर देने की प्रवृति को पूरी तरह से त्याग दे।

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