पीएम ई-ड्राइव योजना 2026: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की नई रफ्तार
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| PM E-DRIVE Scheme 2026: New Momentum for Electric Vehicles in India |
पीएम ई-ड्राइव योजना के मुख्य उद्देश्य
इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य भारत को एक स्वच्छ और हरित परिवहन प्रणाली की ओर ले जाना है. इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. लागत में कमी: ग्राहकों को ईवी की खरीद पर अग्रिम वित्तीय प्रोत्साहन (Subsidies) देकर वाहनों की शुरुआती लागत को कम करना.
2. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: पूरे देश में सार्वजनिक स्थानों और राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशनों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना.
3. घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा: भारत में ही इलेक्ट्रिक वाहनों और उनकी बैटरियों के निर्माण (Make in India) को बढ़ावा देना.
4. भारी वाहनों पर ध्यान: ई-बस, ई-ट्रक और ई-एम्बुलेंस जैसे कमर्शियल वाहनों के विद्युतीकरण को तेजी से बढ़ाना.
2026 के नए संशोधन और समयसीमा
भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) द्वारा जारी हालिया संशोधनों के अनुसार, इस 10,900 करोड़ रुपये के कुल बजट वाली योजना को अब 'फंड-लिमिटेड' (Fund-Limited) श्रेणी में रखा गया है. इसका मतलब है कि यदि निर्धारित बजट तय समय से पहले समाप्त हो जाता है, तो सब्सिडी भी बंद हो सकती है.
वाहन श्रेणियों के आधार पर सब्सिडी की नई समयसीमा और नियम इस प्रकार तय किए गए हैं:
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-2W) के लिए सब्सिडी का लाभ उठाने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है, और इसके लिए वाहन की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये तक होनी चाहिए. वहीं, ई-रिक्शा और ई-कार्ट (e-3W) के लिए अंतिम तिथि 31 मार्च 2028 रखी गई है, जिसकी अधिकतम मूल्य सीमा 2.5 लाख रुपये तक है. कमर्शियल उपयोग में आने वाले थ्री-व्हीलर्स (L5 श्रेणी) के लिए निर्धारित लक्ष्य पूरा होने के कारण इसकी सब्सिडी 26 दिसंबर 2025 को ही बंद की जा चुकी है. हालांकि, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए ई-बस और ई-ट्रक की समयसीमा को 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है.
योजना के तहत मिलने वाली यह सब्सिडी वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत का अधिकतम 15% या सरकार द्वारा तय की गई एक निश्चित राशि (जो भी कम हो) के रूप में दी जा रही है. साथ ही, केवल उन्हीं इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन मिलेगा जिनमें उन्नत (Advanced) बैटरी का उपयोग किया गया है.
बुनियादी ढांचे के लिए बड़ा बजट
भारत सरकार का ध्यान केवल सब्सिडी देने पर ही नहीं, बल्कि ईवी के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने पर भी है. देश भर में पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है.
इसके तहत बड़े पैमाने पर फास्ट चार्जर्स स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें चार पहिया वाहनों के लिए 22,100 फास्ट चार्जर्स, इलेक्ट्रिक बसों के लिए 1,800 एवं अन्य वाहनों के लिए 48,400 चार्जर्स शामिल हैं. इसके अलावा, उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए दिन के समय (सोलर ऑवर्स) चार्जिंग शुल्क कम रखने और बिजली की लागत को नियंत्रित रखने के दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं.
निष्कर्ष
पीएम ई-ड्राइव योजना भारत को पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर मोड़ने में एक ऐतिहासिक कदम है. सब्सिडी की नई समयसीमा (विशेष रूप से टू-व्हीलर्स के लिए जुलाई 2026 तक) को देखते हुए यह स्पष्ट है कि सरकार अब बाजार को आत्मनिर्भर बनाने और भारी सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक करने पर अधिक केंद्रित हो रही है. यदि आप भी इलेक्ट्रिक स्कूटर या वाहन खरीदने की सोच रहे हैं, तो सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए नियमों और समयसीमा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

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