Samvidhan Ki Prastavana In Hindi Full details Key Highlights

Rajkumar Yadav
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 संविधान की प्रस्तावना या उद्देशिका

नेहरू द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य संकल्प में जो आदर्श प्रस्तुत किया गया उन्हें ही संविधान की उद्देशिका यानी प्रस्तावना में शामिल कर लिया गया। 
42 वे संविधान संशोधन, 1976 में प्रस्तावना में संशोधन किया गया। अत: 42 वे संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा "प्रस्तावना" में समाजवाद पंथनिरपेक्ष और राष्ट्र की अखंडता शब्द जोड़े गए।


"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की और एकता अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृंढ संकल्प हो कर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ई0 "मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सवत दो हजार छह विक्रमी" को एतद द्वारा संविधान को अंगीकृत, अधिनियिमत और आत्मसमर्पित करते है।"

"हम भारत के लोग"

हम भारत के लोग सम्पूर्ण भारतीय राजव्यवस्था का मूल आधार है। "हम भारत के लोग" इन शब्दों से यह परिलक्षित होता है। की संविधान की स्त्रोत जनता है।

"सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न"

भारत अपने आंतरिक और बाह्रा मामलों में पूर्णत: स्वतंत्र है। अन्य कोई सत्ता इसे अपने आदेश के पालन के लिए विवश नहीं कर सकती है।

"समाजवादी"

राष्ट्र की आर्थिक गतिविधियों पर सरकार के माध्यम से पुरे समाज का अधिकार होने को मान्यता दी जाती है।  42 वे संविधान संशोधन द्वारा शामिल किए जाने से पूर्व यह निति निर्देशक तत्वों के माध्यम से संविधान में शामिल था। "समाजवादी" शब्द को उद्देशिका में सम्मिलित करना हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के उद्देश्यों के अनुरूप है।

"पंथनिरपेक्ष"

भारत एक राष्ट्र के रूप में, किसी धर्म विदेश विशेष को मान्यता नहीं देता है। इससे यह भी घोषित होता है। की भारत सभी धर्मों का आदर समान रूप से करता है। सभी नागरिक अपने व्यक्तिगत विश्वास, आस्था, और धर्म का पालन, सरक्षण और संवर्धन करने के लिए स्वतंत्र है।

"लोकतंत्रात्मक"

उद्देशिका में प्रयुक्त लोकतान्त्रिक शब्द भारत को लोकतंत्रात्मक प्रणाली का राष्ट्र घोषित करता है। भारत ने अप्रत्यक्ष लोकतंत्र के अंतर्गत संसदीय प्रणाली को अपने ऐतिहासिक अनुभवों के आधार पर चुना।

"गणराज्य"

गणराज्य शब्द का तात्पर्य है की राष्ट्र का प्रमुख या अध्यक्ष नियमित अंतराल पर नियमित कार्यकाल के लिए चुना जाता है।

"सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय"

उद्देशिका भारत के नागरिकों को आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक न्याय प्राप्त कराने के उद्देश्य की घोषणा करती है। तथा सामाजिक, आर्थिक, और राजनैतिक न्याय का लक्ष्य 1917 की रुसी क्रांति से प्रेरित है।

"विचार अभिव्यक्ति विश्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता"

इस शब्द का नकारात्मक अर्थ होता है। "प्रतिबंधों का अभाव" जबकि सामान्य अर्थ होता है व्यक्तिगत विकास हेतु समान अवसरों की उपलब्धता। तथा संविधान के भाग - 3 में मूल अधिकारों के अंतर्गत इसका प्रावधान किया गया है।

"प्रतिष्ठा और अवसर की समता"

अतार्किक विशेषाधिकारों की समाप्ति, आगे बढ़ने के समान अवसर तथा मानव होने के आधार पर सभी समान है। तथा इससे सम्बंधित प्रावधान संविधान के भाग - 3 और भाग - 4 में उल्लेखित है। 

"व्यक्ति की गरिमा, राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता"

प्रस्तावना के उद्देश्य

सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय उपलब्ध कराना। विचार, मत, विश्वास, धर्म, तथा उपासना की स्वतंत्रता प्रदान करना। पद और अवसर की समानता देना। व्यक्ति की गरिमा एवं राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली बंधुता स्थापित करना।

प्रस्तावना की मुख्य बाते

संसद संविधान के मूल ढांचे में नकारात्मक संशोधन नहीं कर सकती है। स्पष्टत: संसद वैसा संशोधन कर सकती है। जिससे मूल ढांचे का विस्तार व मजबूतीकरण होता है। अर्थात संविधान की प्रस्तावना को "संविधान की कुंजी" कहा जाता है। 
तथा 42 वे संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा "समाजवाद", "पंथनिरपेक्ष", और "राष्ट्र की अखंडता" शब्द जोड़े गए।

महत्वपूर्ण

भाग - 1

भारत की सम्प्रभुता भारत की जनता में निहित है। भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लांगू हुआ। अब तक भारत के संविधान की उद्देशिका में एक बार संशोधन किया जा चूका है। 
गणतंत्र होता है - राज्य जहाँ पर अध्यक्ष वंशानुगत रूप से न हो। तथा भारत का संविधान पूर्ण रूप से 26 जनवरी 1949 को तैयार हुआ। 
सामाजिक समता का अर्थ है - भेदभाव का आभाव। और लोक कल्याण शब्द भारत के संविधान की उद्देशिका में नहीं है।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से घोषणा की गई है की भारत एक धर्म निरपेक्ष राज्य है। तथा भारतीय संविधान की प्रस्तावना में मूल अधिकारों राज्य के निति निर्देशक सिद्धांतों एवं मूल कर्तव्यों में आगे व्याख्या की गई है। 

भारतीय संविधान के 42 वे संशोधन द्वारा प्रस्तावना में दो शब्द "समाजवादी" और "धर्मनिरपेक्ष" जोड़े गए है। तथा इसी संशोधन में "समाजवाद" शब्द भी जोड़ा गया है। व भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुसार भारत के शासन की सर्वोच्च सत्ता जनता में निहित है। 

तथा धर्मनिरपेक्ष शब्द भारत के संविधान की उद्देशिका (प्रस्तावना) का एक भाग 42 वे संशोधन के बाद माना गया।

तथा भारतीय संविधान, भारत की जनता द्वारा स्वीकृत है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। जहाँ प्रत्येक धर्म का सम्मान किया जाता है। तथा समाजवादी धर्मनिरपेक्ष वे दो शब्द है। जिनका समावेशन 42 वे संशोधन द्वा रा संविधान की उद्देशिका में किया गया था।

प्रस्तावना का प्रजातंत्र वह प्रावधान है। जो सभी वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार प्रदान करता है। तथा 42 वे संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा प्रस्तावना में गुटनिरपेक्ष शब्द नहीं जोड़ा गया। 

भारत में लौकिक सार्वभौमिकता है। क्योकि संविधान की प्रस्तावना "हम भारत के लोग" शब्दों से प्रारंभ होती है। भारत एक गणतंत्र है। इसका अर्थ - भारत में वंशानुगत शासक नहीं है। 

भाग - 2

A- 48A के अनुसार प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा प्राकृतिक पर्यावरण का सरक्षण एवं सुधार करना। तथा A- 311 द्वारा लोक सेवाओं को सरक्षण प्रदान किया गया है। व केंद्र राज्य के प्रशासनिक सम्बन्ध भारतीय संविधान के A- 256 - 263 में वर्णित है।

भारतीय संविधान के A- 51A में मौलिक कर्तव्यों की चर्चा की गई है। तथा संविधान के A- 350A के अंतर्गत प्रत्येक राज्य मातृभाषा का प्रसार एवं अनुदेश प्राथमिक शिक्षा में लागूं कर सकता है। व संविधान के A- 343A में हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश दिया गया है। 

तथा भारतीय संविधान के A- 40A में राज्य सरकार को ग्राम पंचायत के संगठन का निर्देश देता है। राष्ट्रपति A- 85 के अंतर्गत लोकसभा को भंग कर सकता है। व A- 355 में संविधान के संशोधन की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। A- 352 के अंतर्गत राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा कर सकता है। तथा भारतीय संविधान के A- 280 के अंतर्गत वित्त आयोग के गठन का प्रावधान है। व भारतीय संविधान के मूल संविधान को 22 भागों में विभक्त किया गया था। तथा A- 356 का सम्बन्ध राष्ट्रपति शासन से है।

संघ लोक सेवा आयोग के कार्यों का उल्लेख A- 320 के अंतर्गत है तथा संविधान के A- 350 में राज्यों द्वारा प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दिए जाने का प्रावधान है। A- 360 के आधार पर वित्तीय आपात की घोषणा राष्ट्रपति करता है।अर्थात भारत में एक भी बार वित्तीय आपात की घोषणा नहीं हुई अथवा वित्तीय आपात नहीं लगा है।

A- 343 में यह प्रावधान किया गया है की संघ की राजभाषा हिंदी तथा लिपि देवनागरी होगी। तथा A- 243 (I) के अंतर्गत हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया। व भारतीय संविधान के A- 371 में विभिन्न राज्यों से सम्बंधित विशिष्ट प्रावधानों का उल्लेख है। वर्तमान में भारतीय संविधान के कुल 22 भाग है।

भाग - 3

भारतीय संविधान में प्रस्तावना को "संविधान की कुंजी" की संज्ञा दी गई है। भारत के संविधान की प्रस्तावना या उद्देशिका 'हम भारत के लोग' से शुरू होती है। तथा संविधान निर्माताओं ने सबसे अधिक ध्यान प्रस्तावना पर दिया है। संविधान की प्रस्तावना के अनुसार भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है। व भारत एक "धर्म निरपेक्ष राष्ट्र" का अर्थ - यह किसी निश्चित धर्म का समर्थन नहीं करता है।

42 वे संशोधन में, प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष व अखंडता शब्द बढ़ाए गए। व भारत एक 'गणतंत्र' है। इसका अर्थ - भारत में वंशानुगत शासक नहीं है। तथा लोक कल्याण शब्द संविधान की उद्देशिका, में नहीं है। कल्याणकारी राज्य का उद्देश्य, कमजोर वर्गों के कल्याण का प्रबंध करना है। अत: भारत में लौकिक सार्वभौमिकता है क्योकि संविधान की प्रस्तावना हम भारत के लोग से शुरू होती है। तथा भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुसार भारत के शासन की शक्ति जनता के पास होती है। तथा भारतीय संविधान की उद्देशिका में परिवर्तन 42 वे संशोधन अधिनियम में किए गए है। व संविधान की प्रस्तावना का प्रजातंत्र प्रावधान जो सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार प्रदान करता है। तथा संविधान की प्रस्तावना में देश को "भारत और इंडिया" के नाम से पुकारा गया है। व भारतीय संविधान में लोकतान्त्रिक गणतंत्र को अपनाया गया है।

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