प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार का संक्षिप्त विवरण एवं साक्षात्कार के विभिन्न पक्ष
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| प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार |
प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार
भारत में लगभग प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार का आयोजन किया जाता है। लिखित परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थी के पुस्तकीय ज्ञान का परिक्षण हो जाता है। परन्तु उसके व्यावहारिक ज्ञान, निर्णय क्षमता, बोलचाल का तरीका, धैर्य, संयम एवं व्यक्तित्व का परिक्षण साक्षात्कार के माध्यम से ही हो पाता है। तथा अभ्यथी ने समय और परिस्तिथि के अनुसार कैसा और किस प्रकार व्यवहार किया, उसे परखा जाता है।
साक्षात्कार नियोक्ता एवं नियुक्ति के लिए इच्छुक अभ्यर्थी के मध्य औपचारिक मीटिंग होती है। जिसके माध्यम से मुख्यता दो उद्देश्य पुरे किए जाते है -
- अभ्यर्थी का वह ज्ञान या उससे वह सूचना प्राप्त करना जो केवल सम्मुख (FACE TO FACE) वार्ता द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।
- उम्मीदवार के व्यक्तित्व का परिक्षण।
साक्षात्कार के विभिन्न पक्ष
हम कह सकते है की "साक्षात्कार" अभ्यथी से ऐसी सभी जानकारियों को प्राप्त करने का वैज्ञानिक तरीका है। जो लिखित परीक्षा के माध्यम से प्राप्त नहीं की जा सकती। जिस प्रकार प्रत्येक वैज्ञानिक प्रक्रिया के कुछ निर्धारित मापदंड एवं तरीके होते है। उसी प्रकार साक्षात्कार के माध्यम से परिक्षण के भी कुछ मियत तरीके होते है। मोटे तौर पर इन्हे दो भागों में बांटा जा सकता है।
(1) अभाषिक पक्ष (NON - VERBAL): अभ्यर्थी के व्यवहार एवं बाह्रा प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन।
(2) भाषिक पक्ष (VERBAL): अभ्यर्थी से वार्तालाप के आधार पर मूल्यांकन।
(3) व्यावहारिक पक्ष (PRACTICAL ASPECT): साक्षात्कार के संदर्भ में व्यावहारिक पक्ष ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योकि सर्वाधिक महत्त्व इसी बात का है। की सैद्वांतिक अध्ययन को अभ्यर्थी व्यावहारिक स्तर पर कितना क्रियान्वित कर पाता है।
साक्षात्कार
- अभाषिक पक्ष
- भाषिक पक्ष
- व्यावहारिक पक्ष
अभाषिक पक्ष
| प्रदर्शन | व्यक्तित्व प्रश्नावली |
| वस्त्र | विषय आधारित प्रश्नावली |
| हेयर स्टाइल | सामयिक एवं सामान्य जानकारी आधारित प्रश्नावली |
| चेहरे की अभिव्यक्ति | पद / संगठन प्रश्नावली |
| हाव - भाव | विशेष क्षमता और दक्षता आधारित प्रश्नावली |
| शारीरिक क्रियाएं | चलने का ढंग तथा साक्षात्कार कक्ष मे प्रवेश का तरीका |
| साक्षात्कारकर्ता के सामने बैठने का तरीका | |
| वापस आने या साक्षात्कार कक्ष छोड़ने का तरीका | |
| किसी भी समस्या के निवारण में उसकी दक्षता और क्षमता का प्रयोग | |
| परिस्तिथियों के अनुसार व्यवहार |
- वाक्चातुर्य
- आत्मविश्वास
- मानसिक सतर्कता
- मानसिक दृंढ़ता
अभाषिक पद्धति के माध्यम से साक्षात्कारकर्ता आपके सैद्वांतिक ज्ञान की अपेक्षा व्यावहारिक ज्ञान का परिक्षण करते है। इसमें शब्दों की अपेक्षा आपके तौर - तरीकों, बाहरी व्यक्तित्व, बात करने का ढंग इत्यादि के माध्यम से परिक्षण किया जाता है। कहने का तात्पर्य यह है की अभाषिक पद्धति के माध्यम से मुख्यत: आपके व्यक्तित्व का परिक्षण किया जाता है। व्यक्तित्व परिक्षण के अंतर्गत प्रदर्शन वाक्चातुर्य, आत्मविश्वास, मानसिक सतर्कता , और मानसिक दृंढ़ता आदि का आकलन आपको देखकर तथा वार्ता के माध्यम से किया जाता है। इसके आकलन के लिए साक्षात्कार बोर्ड में एक मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ भी बैठता है। यद्पि अन्य सभी सदस्य भी उपर्युक्त गुणों का अवलोकन करते रहते है।
और यह जरुरी नहीं की इन गुणों का अवलोकन वे केवल आपके बाह्रा व्यक्तित्व के माध्यम से ही करे। कभी - कभी इन गुणों के अवलोकन हेतु वे कुछ निर्धारित प्रश्न भी पूछते है।
अभाषिक पद्धति के माध्यम से उम्मीदवारों के गुणों व ज्ञान का आकलन
अभाषिक पद्धति के तहत साक्षात्कारकर्ताओं द्वारा पूछे जानेवाले प्रश्नों को चार भागों में बांटा जा सकता है -
(1) प्रारंभिक प्रश्न अर्थात उम्मीदवारों की व्यक्तिगत जानकारियों से सम्बंधित प्रश्न - इस भाग में उम्मीदवार का नाम, निवास स्थान, पिता का व्यवसाय, तथा रूचि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते है। चूँकि ये प्रश्न साक्षात्कार के प्रारंभ में पूछे जाते है। अत: इन प्रश्नों की तैयारी सूक्ष्म एवं गहन विश्लेषण के साथ करनी चाहिए। कारण यह है की इन प्रश्नों के सटीक उत्तर दे देने पर साक्षात्कार के दौरान ही अभ्यर्थी में आत्मविश्वास का संचार हो जाता है।
(2) अध्ययन किए गए विषय से संबंधित प्रश्न - सामान्यत: इससे संबंधित प्रश्न साक्षात्कार के मध्य में पूछे जाते है। प्राय: स्नातक परीक्षा में अभ्यर्थी द्वारा अध्ययन किए गए विषयों से ऐसे प्रश्न पूछे जाते है। जिससे अभ्यर्थी की विषय से संबंधित प्रारंभिक जानकारियों का अवलोकन किया जा सके।
(3) सामयिक गतिविधियों से संबंधित प्रश्न - साक्षात्कार के दौरान प्रमुख राष्ट्रीय / अंतराष्ट्रीय गतिविधियों से संबंधित प्रश्नों के पूछे जाने का प्रचलन है। इसमें मुख्य रूप से विगत वर्ष की चर्चित घटनाओं को आधार बनाया जाता है।
(4) पद और संगठन से संबंधित जानकारी - उम्मीदवारों से यह अपेक्षा की जाती है कि जिस पद / संगठन के लिए चुने जाने की वे आकांशा रखते है। उससे संबंधित सामान्य जानकारी रखे। अत: साक्षात्कार के दौरान पद / संगठन से संबंधित सामान्य जानकारियों को भी पूछ लिया जाता है।

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